तेनालीराम की कहानियां : तेनाली की कला

WD|
FILE


विजयनगर के राजा अपने महल में चित्रकारी करवाना चाहते थे। इस काम के लिए उन्होंने एक चित्रकार को नियुक्त किया। चित्रों को जिसने देखा सबने बहुत सराहा, पर को कुछ शंका थी। एक चित्र की पृष्ठभूमि में प्राकृतिक दृश्य था।

उसके सामने खड़े होकर उसने भोलेपन से पूछा, 'इसका दूसरा पक्ष कहां है?

इसके दूसरे अंग कहां हैं?' राजा ने हंसकर जवाब दिया, 'तुम इतना भी नहीं जानते कि उनकी कल्पना करनी होती है।' तेनालीराम ने मुंह बिदकाते हुए कहा, 'तो चित्र ऐसे बनते हैं! ठीक है, मैं समझ गया।'




और भी पढ़ें :