तेनालीराम की कहानियां : हाथियों का उपहार


किसी ने हाथियों की दुर्दशा के विषय में राजा को सूचना दी। राजा हाथियों के प्रति के इस व्यवहार से अप्रसन्न हो गए। उन्होंने तेनालीराम को दरबार में बुलाया और पूछा, 'तेनाली, तुमने हाथियों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार क्यों किया?'


तेनालीराम बोला- 'महाराज, आपने मुझे पांच हाथी उपहार में दिए। उन्हें अस्वीकार करने से आपका अपमान होता। यह सोचकर मैंने उन हाथियों को स्वीकार कर लिया। परंतु यह उपहार मेरे ऊपर एक बोझ बन गया, क्योंकि मैं एक निर्धन व्यक्ति हूं मैं पांच हाथियों की देखभाल का अतिरिक्त भार नहीं उठा सकता था अतः मैंने उन्हें देवी काली को समर्पित कर दिया। अब आप ही बताइए, यदि आप पांच हाथियों के स्थान पर मुझे पांच गायें उपहार में दे देते तो वे मेरे परिवार के लिए ज्यादा उपयोगी साबित होतीं।'

राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ, वे बोले, 'यदि मैं तुम्हें गायें देता, तब तुम उनके साथ भी तो ऐसा दुर्व्यवहार करते?'

'नहीं महाराज! गायें तो पवित्र जानवर हैं और फिर गाय का दूध मेरे बच्चों के पालन-पोषण के काम आता। उल्टे इसके लिए वे आपको धन्यवाद देते और आपकी दया से मैं गायों के व्यय का भार तो उठा ही सकता हूं।'
राजा ने तुरंत आदेश दिया कि तेनाली से हाथियों को वापस ले लिया जाए तथा उनके स्थान पर उसे पांच गायें उपहार में दी जाएं।



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