तेनालीराम की कहानियां : बहुरुपिए हैं या राजगुरु

WD|

फिर ने बहुरुपिए से कहा, ‘महाराज, तुम्हारी कला से बहुत प्रसन्न हैं। वे चाहते हैं कि कल तुम सती स्त्री का स्वांग दिखाओ। अगर उसमें तुम सफल हो गए तो महाराज की ओर से तुम्हें पुरस्कार के रूप में पांच हजार स्वर्ण मुद्राएं भेंट की जाएंगी।’


बहुरुपिए के वेश में छिपे राजगुरु ने मन ही मन कहा कि इस बार तो बुरे फंसे, लेकिन अब स्वांग दिखाए बिना चारा भी क्या था? तेनालीराम ने एक कुंड बनवाया। उसमें बहुत-सी लकड़ियां जलवा दी गईं। वैद्य भी बुलवा लिए गए कि शायद तुरंत उपचार की आवश्यकता पड़े।

बहुरुपिया सती का वेश बनाकर पहुंचा। उसका पहनावा इतना सुंदर था कि कोई कह नहीं सकता था कि वह असली स्त्री नहीं है। आखिर उसे जलते कुंड में बैठना ही पड़ा। कुछ पलों में ही लपटों में उसका सारा शरीर झुलसने लगा। तेनालीराम से यह देखा न गया। उसे दया आ गई। उसने बहुरुपिए को कुंड से बाहर निकलवाया।



और भी पढ़ें :