तेनालीराम की कहानियां : बहुरुपिए हैं या राजगुरु

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बहुरुपिए ने कहा, ‘मैं शेर का स्वांग बहुत अच्छा करता हूं महाराज, लेकिन उसमें खतरा है। उसमें कोई घायल भी हो सकता है और मर भी सकता है। इस स्वांग के लिए आपको मुझे एक खून माफ करना पड़ेगा।’

महाराज ने उनकी शर्त मान ली। ‘एक शर्त और है महाराज। मेरे स्वांग के समय भी दरबार में अवश्य उपस्थित रहें,’ बहुरुपिया बोला।

‘ठीक है, हमें यह शर्त भी स्वीकार है,’ महाराज ने सोचकर उत्तर दिया।
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