तेनालीराम की कहानियां : तेनालीराम और लाल मोर

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ने यह सुनकर एक व्यक्ति की तरफ इशारा किया, 'महाराज अगर कुछ देना ही है तो इस चित्रकार को दें। इसी ने इन नीले मोरों को इतनी खूबसूरती से रंगा है।'


राजा को सारा गोरखधंधा समझते देर नहीं लगी। वे समझ गए कि पहले दिन दरबारी ने उन्हें मूर्ख बनाया था।


राजा ने उस दरबारी को 25 हजार रुपए लौटाने के साथ 5 हजार रुपए जुर्माने का आदेश दिया। चित्रकार को उचित पुरस्कार दिया गया। दरबारी बेचारा क्या करता, वह बेचारा-सा मुंह लेकर रह गया।



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