सिंहासन बत्तीसी : दसवीं पुतली प्रभावती की कथा

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इसलिए उसके जन्म लेते ही उसके पिता ने नगर से दूर एक सन्यासी की कुटिया में भेज दिया और उसका पालन पोषण उसी कुटिया में हुआ। उसका विवाह भी उसी युवक से संभव है जो असंभव को संभव करके दिखा दे। उस युवक को जिसे मुझसे शादी करनी है खौलते तेल के कड़ाह में कूदकर जिन्दा निकलकर दिखाना होगा।

उसकी बात सुनकर वसु उस कुटिया में गया जहां उसके निवास था। वहां जाने पर उसने कई अस्थि पंजर देखे जो उस राजकुमारी से विवाह के प्रयास में खौलते कड़ाह के तेल में कूदकर अपनी जानों से हाथ धो बैठे थे।

वसु की हिम्मत जवाब दे गई। वह निराश होकर वहां से लौट गया। उसने उसे भुलाने की लाख कोशिश की, पर उसका रूप सोते-जागते, उठते-बैठते- हर समय आंखों के सामने आ जाता है। उसकी नींद उड़ गई। उसे खाना-पीना नहीं अच्छा लगता। अब प्राणान्त कर लेने के सिवा उसके पास कोई चारा नही बचा।

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