सिंहासन बत्तीसी : सत्रहवीं पुतली विद्यावती की कहानी

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शिव को प्रसन्न करने के लिए हवन कुण्ड में अपने अंग काटकर डाल रहे हैं। अगर उन्हीं की तरह राजा विक्रमादित्य उस हवन कुण्ड में अपने अंग काटकर फेंकें, तो शिव प्रसन्न होकर उनसे उनकी इच्छित चीज मांगने को कहेंगे। वे शिव से ब्राह्मण दम्पति के लिए संतान की मांग कर सकते हैं और उन्हें सन्तान प्राप्ति हो जाएगी।

विक्रम ने यह सुनकर उन्हें आश्वासन दिया कि वे यह कार्य अवश्य करेंगे। रास्ते में उन्होंने बेतालों को स्मरण कर बुलाया तथा उस हवन स्थल तक पहुंचा देने को कहा। उस स्थान पर सचमुच साधु-संन्यासी हवन कर रहे थे तथा अपने अंगों को काटकर अग्नि-कुण्ड में फेंक रहे थे।



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