सिंहासन बत्तीसी : सत्रहवीं पुतली विद्यावती की कहानी

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विक्रम ने अपना परिचय देकर उनसे उनकी समस्या के बारे में पूछा तो वे थर-थर कांपने लगे। जब उन्होंने निर्भय होकर उन्हें सब कुछ स्पष्ट बताने को कहा तो ब्राह्मण ने उन्हें सारी बात बता दी। ब्राह्मण दम्पति विवाह के बारह साल बाद भी नि:संतान थे।

इन बारह सालों में संतान के लिए उन्होंने काफी यत्न किए। व्रत-उपवास, धर्म-कर्म, पूजा-पाठ हर तरह की चेष्टा की, पर कोई फायदा नहीं हुआ। ब्राह्मणी ने एक सपना देखा है।

स्वप्न में एक देवी ने आकर उसे बताया कि तीस कोस की दूरी पर पूर्व दिशा में एक घना जंगल है जहां कुछ साधु-संन्यासी शिव की स्तुति कर रहे हैं।

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