सिंहासन बत्तीसी : पन्द्रहवीं पुतली सुन्दरवती की कहानी

सिंहासन बत्तीसी की रोचक कहानियां

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प्रसन्नता के मारे पन्नालाल को नहीं सूझा कि राजा विक्रम को कैसे धन्यवाद दें। जब वह रथ और घोड़े सहित चला गया, तो विक्रम को चिन्ता हुई कि जिस काम के लिए सेठ ने रथ लिया है, कहीं वह कार्य भीषण वर्षा की वजह से बाधित न हो जाए।

उन्होंने मां काली द्वारा प्रदत्त बेतालों का स्मरण किया और उन्हें सकुशल वर को विवाह स्थल तक ले जाने तथा विवाह सम्पन्न कराने की आज्ञा दी। जब वर वाला रथ पवन वेग से दौड़ने को तैयार हुआ, तो दोनों बेताल छाया की तरह रथ के साथ चल पड़े।

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यात्रा के मध्य में सेठ ने देखा कि रास्ता कहीं भी नहीं दिख रहा है, चारों ओर पानी ही पानी है तो उसकी चिन्ता बहुत बढ़ गई। उसे सूझ नहीं रहा था कि क्या किया जाए? तभी अविश्वसनीय घटना घटी। घोड़ों सहित रथ जमीन के ऊपर उड़ने लगा।



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