लाहौर जेल में बंद रंजीत के परिजन दहशत में

सीतामढ़ी| भाषा| पुनः संशोधित बुधवार, 1 मई 2013 (23:15 IST)
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सीतामढ़ी। के पंजाब प्रांत की में बंद भारतीय कैदी सरबजीत सिंह पर घातक हमले के बाद में बंद के सीतामढ़ी जिले के एक अन्य कैदी उर्फ का परिवार दहशत में है और उन्हें आशंका है कि रंजीत के साथ भी कोई अनहोनी हो सकती है


सीतामढ़ी जिले के पुपरी थाना अंतर्गत मोनहरवा गांव निवासी रंजीत कुमार ठाकुर की मां ने कहा कि उन्हें इस बात का डर है कि रंजीत के साथ भी वैसा ही हो सकता है जैसा सरबजीत के साथ हुआ। भारत सरकार मेरे बेटे को वापस लाए।

रंजीत के पिता का कहना है कि करीब 12 साल की उम्र में उनका पुत्र वर्ष 1999 में कामकाज की तलाश में दिल्ली गया था। शुरुआत में उसने एक-दो बार पत्र भेजकर अपनी खैर-खबर के बारे में बताया पर उसके बाद काफी समय तक उसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष स्थानीय पुलिस ने उन्हें रंजीत के लाहौर जेल में बंद होने के संबंध में जानकारी दी। गरीब किसान ठाकुर ने बताया कि लाहौर जेल से आठ जून 2012 को रंजीत की शिनाख्त को लेकर पत्र भेजे जाने पर बिहार के गृह विभाग के निर्देश पर स्थानीय पुलिस उनके घर आई थी।


लाहौर जेल के उक्त पत्र पर कैदी का नाम हालांकि राजू बाबू सहाय लिखा था पर उस पर लगे फोटो के जरिए उन्होंने पहचान लिया कि यह उनका पुत्र रंजीत है। रंजित की मां का कहना है कि उनके पुत्र ने दिल्ली जाने के बाद अपना नाम कब और क्यों बदला और वह कैसे पाकिस्तान पहुंचा और किस जुर्म में लाहौर जेल में बंद है? इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। (भाषा)



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