...तो भारत में भी होंगे मिस्र जैसे हालात-अन्ना हजारे

- वेबदुनिया

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जनता की सहभागिता जरूरी : अन्ना हजारे ने कहा कि पंजाब के जलियांवाला बाग से शुरू हुई जनतंत्र यात्रा हरियाणा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में अपना सफर तय कर चुकी है। उन्होंने कहा कि देश में कोई कानून बनाने के लिए लोगों की सहभागिता जरूरी है।

उन्होंने कहा कि कानून संसद में बनते हैं, कानून का ड्राफ्ट समाज के विशेषज्ञ लोगों की सहमति से बनना चाहिए, यही असल जनतंत्र है। लेकिन मसौदा भी सरकार बनाती है, कानून भी सरकार बनाती है, यहां जनतंत्र कहां है? उन्होंने कहा कि जनता का पैसा कहां खर्च होता है? क्या काम हुए? इसकी जानकारी जनता को होना जरूरी है, लेकिन यह जानकारी होती नहीं है।

प्रधानमंत्री इस्तीफा दें : अन्ना हजारे ने कहा कि प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह को पद पर बने रहने का अधिकार ही नहीं है। कोयला घोटाला मामले में उन्हें तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरा विरोध किसी खास पार्टी को लेकर नहीं है। मेरा काम सिर्फ समाज के लिए है। नेताओं द्वारा विरोध किए जाने के मुद्दे पर अन्ना ने कहा कि 'सच बोलो तो सगी मां को भी गुस्सा आ जाता है'।

जनता चुने प्रधानमंत्री : गांधीवादी समाजसेवी ने कहा कि प्रधानमंत्री किसी पार्टी का नहीं जनता द्वारा चुना जाना चाहिए। प्रधानमंत्री राहुल गांधी बनें या फिर नरेन्द्र मोदी, इससे कुछ नहीं होने वाला। उन्होंने उम्मीद जताई कि जनतंत्र मोर्चे के संघर्ष का परिणाम अच्छा होगा क्योंकि आजादी भी लंबे संघर्ष के बाद ही मिली थी।



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