बजट मुद्दे पर विपक्ष का सदन से वाकआउट

नई दिल्ली| भाषा|
हमें फॉलो करें
FILE
नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को भाजपा और वामदलों सहित विपक्षी दलों ने पर एक के बाद एक घोटालों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए सदन में महत्वपूर्ण वित्तीय कामकाज निपटाए जाने से पहले किया।


लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने मध्यान्‍ह सदन की कार्यवाही पुन: शुरू होने पर कहा कि मौजूदा हालात में और रेलवे की अनुदान मांगों को बिना चर्चा के पारित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस पर कल कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में भाग लेने वाले सभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनी थी और इसे बिना चर्चा के निपटाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सदन के पास महत्वपूर्ण वित्तीय कामकाज को निपटाने के लिए काफी कम समय बचा है और वित्त विधेयक को लोकसभा में पारित कर राज्यसभा को भी भेजा जाना है।


लेकिन विपक्षी सदस्यों ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया और उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिए जाने की मांग की। तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि नियम बिना चर्चा के वित्त विधेयक को पारित कराने की अनुमति नहीं देते। अगर ऐसा करना है तो सरकार नियमों से परे हटने के लिए प्रस्ताव लाए।

अध्यक्ष ने इससे पहले विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज को अपनी बात रखने की अनुमति दी। सुषमा ने एक के बाद एक सामने आ रहे घोटालों की पृष्ठभूमि में संसद नहीं चलने देने के लिए पूरी तरह सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि भाजपा वित्तीय कामकाज में न तो बाधक बनना चाहती है और न ही भागीदार, इसलिए हम वाकआउट कर रहे हैं।

सुषमा का भाषण समाप्त होते ही भाजपा और शिवसेना सदस्य सदन से वाकआउट कर गए। इसके बाद जनता दल यू, वामदल, अन्नाद्रमुक, द्रमुक, बीजद, तेदेपा तथा तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने भी अपनी बात रखी और इन सभी दलों के सदस्य अलग-अलग मुद्दों को लेकर सदन से वाकआउट कर गए। (भाषा)



और भी पढ़ें :