जनता रो रही है, सरकार सो रही है!

नई दिल्ली (भाषा)| भाषा| पुनः संशोधित मंगलवार, 4 अगस्त 2009 (21:07 IST)
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पर आवश्यक वस्तुओं की बेतहाशा बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने में विफल रहने का आरोप मढ़ते हुए ने जानना चाहा कि की कम के कारण अनाज उत्पादन कम होने की स्थिति से निपटने के लिए क्या कोई आपात योजना बनाई गई है।


भाजपा ने कहा कि के कारण आज ऐसे हालात हो गए हैं कि जनता रो रही है और सरकार सो रही है। भाजपा के एम वेंकैया नायडू ने आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि पर चर्चा में भाग लेते हुए सरकार से सवाल किया कि भविष्य के लिए आपकी क्या योजना है।
उन्होंने जानना चाहा कि क्या सरकार के पास कोई आपात योजना है। नायडू ने कहा कि जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं, उससे साफ लगता है कि चावल, दाल और चीनी के उत्पादन में इस साल गिरावट आएगी। उन्होंने सरकार को इस संबंध में दीर्घकालिक योजना बनाने का सुझाव दिया।


मशहूर कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन के हवाले से उन्होंने कहा कि इस साल चावल का उत्पादन 15 प्रतिशत तक कम हो सकता है। नायडू ने कहा कि यह चिन्ता की बात है कि धान का बुवाई क्षेत्रफल इस साल 20 प्रतिशत तक कम हो गया है।

उन्होंने सवाल किया कि संसद में बहस से क्या महँगाई पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार की उपलब्धि की चर्चा करते हुए कहा कि राजग शासनकाल में कीमतें नियंत्रण में थीं।

भाजपा नेता ने कहा कि महँगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है क्योंकि उसे अपनी आय का 60 प्रतिशत केवल खाने पर ही खर्च करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार आवश्यक वस्तुओं की मूल्य वृद्धि को रोकने में नाकाम रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि जनता रो रही है और सरकार सो रही है।
इससे पहले महँगाई पर अल्पकालिक चर्चा की शुरुआत करते हुए जदयू के शिवानंद तिवारी ने कहा कि एक ओर मंदी और बेरोजगारी से विषम स्थिति उत्पन्न हुई है वहीं दूसरी ओर महँगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है। उन्होंने कहा कि गाँवों की हालत बद से बदतर हो रही है और महँगाई के कारण खर्च चलाने में दिक्कत से परेशान लोग रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। शहरी लोग भी महँगाई से त्रस्त हैं।
तिवारी ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिये महँगाई नियंत्रित करने और वायदा बाजार पर पूर्ण रोक लगाने का सुझाव दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अन्न भंडार को खुले बाजार में मुहैया कराना चाहिए ताकि इसकी कालाबाजारी रोकी जा सके।

कांग्रेस के ईएम सुदर्शन नचिअप्पन ने कहा कि आज लोगों की क्रय शक्ति बढ़ी है लेकिन बाजार शहरी क्षेत्रों में चले गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को गांवों के लिए बाजारों का सृजन सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने पंचायती राज संस्थानों को और अधिकारसंपन्न बनाने तथा कृषि के लिए एक व्यापक कार्यक्रम चलाने की माँग की।



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