भारत में 196 भाषाएं लुप्त होने के कगार पर

नई दिल्ली| भाषा|
यूनेस्को ने अनुसार भारत में 196 भाषाएं ऐसी हैं जो विलुप्त हो गई हैं या होने के कगार पर पहुंच गई हैं।


मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डी. पुरंदेश्वरी ने ‘यूनेस्को एटलस ऑफ वर्ल्डस लैंग्वेजज इन डेंजर’ के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत की 196 भाषाएं विलुप्त होने के कगार पर हैं या विलुप्त हो चुकी हैं।

उन्होंने कप्तान सिंह सोलंकी के सवालों के लिखित जवाब में राज्यसभा को आज यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यूनेस्को के आंकड़ों के अनुसार 196 भाषाओं में से 84 भाषाएं असुरक्षित श्रेणी में हैं जबकि 62 भाषाएं निश्चित रूप से लुप्त होने के कगार पर हैं। आंकड़ों के अनुसार 1950 से नौ भाषाएं विलुप्त हो गई हैं।

पुरंदेश्वरी ने माया सिंह के एक अन्य सवाल के जवाब में बताया कि केंद्रीय विश्वविद्यालय कानून, 2009 के तहत स्थापित सभी 16 केंद्रीय संस्थानों ने काम करना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि बिहार, गुजरात और केरल में ये अस्थायी परिसर में काम कर रहे हैं। (भाषा)



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