कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर जोर

नयी दिल्ली (भाषा) | भाषा| पुनः संशोधित गुरुवार, 2 जुलाई 2009 (13:13 IST)
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आर्थिक समीक्षा 2008-09 में देश की 52 फीसदी आबादी की रोजी रोटी के आधार, कृषि क्षेत्र के समक्ष चुनौतियों को रेखांकित करते हुए इस क्षेत्र की उत्पादकता में सुधार लाने की की जरूरतों पर बल दिया गया है।


गुरुवार को संसद में पेश समीक्षा में कहा गया है कि कृषि क्षेत्र विभिन्न मोर्चे पर चुनौतियों का सामना कर रहा है। आपूर्ति पक्ष में अधिकांश फसलों की उपज में कोई महत्वपूर्ण सुधार नहीं दिखाई दिया है और कुछ मामलों में उपज घटी है।

उत्पादकता बढ़ाने की ओर ध्यान दिए जाने की स्पष्ट आवश्यकता है। समीक्षा में सकल घरेलू उत्पाद में 17.8 फीसदी का योगदान करने वाले इस क्षेत्र में कृषि जोतों के आकार के सिकुड़ने की बात को रेखांकित करते हुए कहा गया है कि गन्ने जैसे कुछ फसलों के मामले में विगत वर्ष में प्रति एकड़ और उत्पादन में भारी मात्रा में घटबढ़ चिंता का विषय है।

समीक्षा में वित्तीय समेकीकरण समिति की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि देश के 73 प्रतिशत से अधिक किसान परिवारों की ऋण के औपचारिक स्रोत तक पहुँच नहीं है।


समीक्षा में कहा गया है कि नए तरह का सांस्थानिक तंत्र वक्त की माँग है जो कृषि क्षेत्र की जोखिम धारक क्षमता को ध्यान में रखकर बनाया गया हो तथा जो ऋण और बीमा उत्पाद सहित वित्तीय उत्पाद की व्यवस्था करता हो।



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