जसवंत की पुस्तक में कंधार अपहरण कांड

नई दिल्ली (भाषा) | भाषा| पुनः संशोधित गुरुवार, 6 अगस्त 2009 (21:01 IST)
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पूर्व विदेश मंत्री ने एक पुस्तक लिखी है जिसमें दिसंबर 1999 में हुई विमान अपहरण की विवादास्पद घटना का उल्लेख होगा।


गौरतलब है कि सिंह की पार्टी के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती राजग सरकार के कंधार विमान अपहरण घटना के दौरान आतंकवादियों को रिहा करने के फैसले के लिए उसकी काफी अलोचनाएँ हुई हैं।

बहरहाल, इस पुस्तक में प्राथमिक तौर पर विभाजन का विश्लेषण और मोहम्मद अली जिन्ना के राजनीतिक जीवन का चित्रण है, लेकिन सिंह पहली बार इस पुस्तक के जरिये अपहरण कांड के बारे में अपनी बात रखने जा रहे हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के यह कहने के बाद एक विवाद ने जन्म ले लिया था कि जब वे तत्कालीन राजग सरकार में उप प्रधानमंत्री थे तो वे 160 यात्रियों की रिहाई और वतन वापसी के लिए सिंह को आतंकवादियों के साथ कंधार भेजने के फैसले के बारे में अवगत नहीं थे। इसके बाद भाजपा पर कांग्रेस तथा अन्य राजनीतिक दलों ने कई हमले किए।

इस 674 पृष्ठीय पुस्तक ‘जिन्ना-इंडिया : पार्टिशन, इंडिपेंडेंस’ का आवरण पृष्ठ कहता है कि सिंह को बतौर विदेश मंत्री हुए अनुभवों पर आधारित अध्यायों में लाहौर शांति प्रक्रिया और कारगिल में विश्वाघात, कंधार, जम्मू कश्मीर विधानसभा, संसद पर हमला और अप्रैल 2003 में की गई शांति की पहल की प्रस्तावना जैसे मुद्दे शामिल हैं।



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