सुषमा-चिदंबरम में खिंची तलवारें

मामला वरुण गाँधी की सुरक्षा बढ़ाने का

नई दिल्ली (भाषा)| भाषा|
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वरुण गाँधी की सुरक्षा को लेकर सरकार और प्रमुख विपक्षी दल भाजपा में बुधवार को फिर ठन गई। भाजपा ने गृहमंत्री पी. चिदंबरम पर आरोप लगाया कि उन्होंने राजनीतिक दाँव के चलते पार्टी के सांसद वरुण गाँधी की सुरक्षा के संबंध में लिखे गोपनीय पत्र को मीडिया में जानबूझकर लीक किया।


पार्टी की संसदीय दल की प्रवक्ता ने यहाँ बताया कि वरुण की सुरक्षा का मामला मंगलवार को लोकसभा में उठाए जाने के बाद चिदंबरम ने उन्हें गोपनीय पत्र लिख कर कहा कि चूँकि वे वरुण की सुरक्षा व्यवस्था का मामला सदन में बता कर उसे सार्वजनिक नहीं करना चाहते, इसलिए वे उनसे अलग से आकर मिलें।
सुषमा ने कहा एक ओर तो चिदंबरम ने उन्हें गोपनीय पत्र लिखा और दूसरी ओर राजनीतिक दाँव के चलते स्वयं ही उसे मीडिया में लीक करके उस गोपनीयता का उल्लंघन भी किया।


उन्होंने आरोप लगाया कि चिदंबरम ने गोपनीय पत्र की भावना के ठीक विपरीत आचरण किया है। उधर, गृहमंत्री ने वरुण गाँधी को समुचित सुरक्षा मुहैया नहीं कराए जाने के भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि खुफिया एजेंसियों से प्राप्त सूचनाओं पर गौर किए जाने के बाद इस युवा सांसद को सुरक्षा दी जा रही है।

भाजपा की उपनेता सुषमा स्वराज ने अपने बयान में कहा था कि जब वरुण गाँधी ने सुरक्षा बढ़ाने का आग्रह किया तो उन्हें इस पर ‘संतोषजनक’ और ‘तर्कसंगत’ जवाब नहीं मिला। जवाब में चिदंबरम ने कहा कि सरकार ने वरुण के 20 मार्च के पत्र पर कार्रवाई की है।

गृहमंत्री ने सुषमा स्वराज को लिखे पत्र में कहा कि सरकार ने खुफिया एजेंसियों से प्राप्त सूचनाओं पर भी ध्यान दिया है। सुरक्षा पाने वाले हर व्यक्ति के मामले की ही तरह वरुण गाँधी को भी मुहैया कराई गई सुरक्षा के स्तर की समयबद्ध ढंग से समीक्षा की जाएगी।
लोकसभा में मंगलवार को शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाए जाने का जिक्र करते हुए चिदम्बरम ने कहा कि उन्हें इस मामले पर सदन में ही प्रतिक्रिया जाहिर करने और वरुण को दी जा रही सुरक्षा के स्तर के बारे में जानकारी देने में खुशी होती, लेकिन ‘‘मेरी समझ है कि मामले पर संसद में चर्चा कराने से वरुण गाँधी को सुरक्षा उपलब्ध कराने का असली मकसद ही खत्म हो जाएगा। लिहाजा मेरा सुझाव है कि अगर आप चाहें तो कृपया मुझसे भेंट कर लें और मैं आपको वरुण को उपलब्ध कराई गई सुरक्षा के बारे में विश्वास में लूँगा।
चिदम्बरम द्वारा पत्र मीडिया में लीक किए जाने के दावे के बारे में जब भाजपा नेता से पूछा गया कि वे किस आधार पर यह आरोप लगा रही हैं तो सुषमा ने कहा कि इस गोपनीय पत्र को उन्होंने केवल पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को दिखाया था, जबकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में इस पत्र की प्रति तक दिखाई जा रही है। मीडिया को वह प्रति कहाँ से मिली। इसका मतलब है कि इस पत्र को बाकायदा सोचसमझ कर लीक किया गया है।
उन्होंने कहा कि गृहमंत्री अगर वरुण गाँधी की सुरक्षा के मामले को इतना ही गोपनीय रखना चाहते थे तो वे पत्र लिखने की बजाए फोन द्वारा ही बातीचत के लिए बुला सकते थे और अगर पत्र उन्होंने लीक नहीं किया है तो वे यह पक्की व्यवस्था करते कि उनके स्टाफ से यह लीक नहीं होने पाए।

सुषमा ने कहा कि चिदंबरम को अगर ऐसा ही करना था तो उन्होंने मामले को बेमतलब गोपनीय बनाने का नाटक क्यों किया। सदन में ही पूरे मामले की जानकारी क्यों नहीं दे दी। उन्होंने कहा कि अब चिदंबरम और उनके बीच वरुण की सुरक्षा को लेकर चर्चा होने की बात सार्वजनिक हो जाने के बाद मीडिया तो उसके बारे में जानना ही चाहेगा।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद चिदंबरम जब मिलने का समय देंगे तो वे उनसे मिलने जाएँगी, लेकिन अपनी ओर से उस बातचीत को सार्वजनिक नहीं करेंगी।

गौरतलब है कि सुषमा ने कहा था कि वरुण ने सुरक्षा के सिलसिले में गृहमंत्री से मुलाकात की थी, लेकिन उन्हें ‘संतोषजनक’ और ‘तर्कसंगत’ जवाब नहीं मिला था। उन्होंने यह भी कहा था कि भाजपा सांसद की सुरक्षा के मामले को गृह सचिव द्वारा देखे जाने की बात कहकर पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता।
गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि 29 वर्षीय सांसद वरुण को विशेष वाई वर्ग की सुरक्षा प्रदान की गई है। इसके तहत उनकी सुरक्षा में तीन अधिकारी, एक एस्कॉर्ट पायलट वाहन तथा 10 गार्ड तैनात किए गए हैं।

वरुण की माँ मेनका गांधी ने भी प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि गृह मंत्रालय उनके बेटे की जान पर पैदा खतरों के प्रति लचर रवैया अपना रहा है।
मेनका ने छोटा शकील गैंग के छह शार्पशूटरों की दिल्ली में हुई गिरफ्तारी का भी यह कहते हुए जिक्र किया है कि वे लोग वरुण को निशाना बनाना चाहते थे। पुलिस ने हालाँकि इस बात को खारिज किया है।



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