दुनिया को भारत की ताकत का संदेश पहुंचाया : मोदी

नई दिल्ली| भाषा|
हमें फॉलो करें
FILE
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षेस देशों के नेताओं को अपने शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित करने को ‘सही समय पर सही फैसला’ करार देते हुए कहा कि उनकी पहली बड़ी विदेश नीति पहल ने दुनिया को भारत की ताकत के बारे में संदेश दिया।


अपनी आश्चर्यजनक पहल के लिए पहली बार बात करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया अब भी इस बारे में बात कर रही है। उनकी इस पहल को चौतरफा प्रशंसा मिली। प्रधानमंत्री बनने के बाद में पहली बार आए मोदी ने कहा कि दुनिया को भारतीय लोकतंत्र की ताकत के बारे में महसूस करना चाहिए ताकि देश को अपना उचित सम्मान और दर्जा मिले।
उन्होंने कहा कि लोगों को उनकी सरकार से काफी अपेक्षाएं हैं और यह उनकी सरकार का कर्तव्य है कि वह उनकी आकांक्षाओं के साथ तालमेल बिठाए। मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘हमने कभी देश की सीमाओं से इतर नहीं सोचा। हम बड़े देश हैं। हम बड़ी शक्ति हैं। हमें दुनिया को यह महसूस कराना चाहिए। एकबार हम इसे कर लेंगे तो दुनिया हमें उचित सम्मान और दर्जा देने से नहीं बचेगी।’

इस संदर्भ में मोदी ने अपनी मंत्रिपरिषद की 26 मई को हुए शपथ ग्रहण समारोह में दक्षेस देशों के नेताओं को आमंत्रित करने की अपनी पहल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह ‘दुनिया को संदेश देने का एक साधन था। वे अब भी इस बारे में चर्चा कर रहे हैं कि क्या हुआ, कैसे हुआ। यह दर्शाता है कि सही समय पर सही फैसला कितना बड़ा नतीजा दे सकता है।’
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ समेत दक्षेस देशों के नेताओं को न्योता देने से मोदी को उनके साथ संपर्क स्थापित करने का मौका मिला। खासतौर पर पाकिस्तान के साथ रिश्तों पर जमी बर्फ को पिघलाने वाले कदम के तौर पर इसे देखा गया और यह कदम रिश्तों को आगे ले जाने का रास्ता बना सकता है।

पार्टी अध्यक्ष और गृह मंत्री और कुछ अन्य नेताओं की मौजूदगी में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के लोकसभा चुनाव में पार्टी को जो बड़ा जनादेश मिला वह ‘उम्मीद के लिए वोट’ था।
पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलने पर उन्होंने कहा कि यह चुनाव 21 वीं सदी में ‘दिशा बदल देने वाला’ है जिसमें सभी पारंपरिक जातिगत, धार्मिक और अन्य राजनैतिक समीकरणों की मतदाताओं ने अनदेखी की और उन्होंने सबकुछ के उपर उम्मीद और आकांक्षाओं की राजनीति को चुना।

देश की जनता के काफी समय पहले कांग्रेस से भ्रमित होने और वैकल्पिक ‘प्रयोग’ के भी मददगार नहीं होने का दावा करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी सरकार की लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की अतिरिक्त जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा, ‘भाजपा को जो स्पष्ट जनादेश (लोकसभा चुनाव में) मिला है वह संभव नहीं होता अगर जमीनी लहर नहीं होती और कश्मीर से कन्याकुमारी तक समान सोच प्रक्रिया नहीं होती।’

मोदी ने भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा कि अगर सरकार का काम लोगों में विश्वास जगाता है कि वह समर्पित होकर उनके कल्याण के लिए काम कर रही है तो वे पार्टी के साथ अपने संबंध को कभी नहीं तोड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि समाज विज्ञानी और राजनैतिक पंडितों को चुनाव और उनकी पार्टी की जीत का अध्ययन करना चाहिए जैसा टोनी ब्लेयर के नेतृत्व में लेबर पार्टी की पहली जीत और बराक ओबामा के राष्ट्रपति के तौर पर पहली बार निर्वाचन पर चर्चा हुई थी और इसपर कई पुस्तकें आईं।

उन्होंने कहा, ‘यह चुनाव राजनैतिक पंडितों, समाज विज्ञानियों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है...। अगर राष्ट्र में इसे उचित महत्व मिलता है, अगर विश्वविद्यालय आगे आते हैं और हम उन सबका दस्तावेजीकरण कर सके और इसे दुनिया के समक्ष पेश कर सके तो यह बड़ी बात होगी।’ उन्होंने यह भी कहा कि समाज विज्ञानियों ने भारत के लोकतंत्र की ताकत के बारे में चर्चा नहीं की है।
मोदी ने कहा, ‘जिस तरीके से इसे प्रस्तुत किया जाना चाहिए न तो चुनाव आयोग और न ही राजनैतिक दलों ने इसे दुनिया के समक्ष रखा है।’ उन्होंने कहा, ‘यह उम्मीद का चुनाव था और नतीजे इसे दर्शा रहे हैं।’ उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं की सराहना की और इस बात को याद किया कि कैसे वह खुश थे जब अटल बिहारी वाजपेई प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार भाजपा मुख्यालय आए थे। उन्होंने शौक से उन दिनों को याद किया जब उन्होंने पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर तब उसके लिए कठोर श्रम किया था।
उन्होंने कहा, ‘जब मैंने उनसे अनुरोध किया :वाजपेयी कि वह मुख्यालय आएं तो उन्होंने मुझसे पूछा था कि उसकी क्या आवश्यकता है। मैंने उनसे कहा कि आप अब प्रधानमंत्री हैं और पार्टी कार्यकर्ता अपने बीच आपको पाकर काफी खुश होंगे। हम काफी उत्साहित थे। अब मैं इसकी कल्पना नहीं कर सकता हूं कि आप मुझे इतना सम्मानित कर रहे हैं।’

भाजपा कार्यकर्ताओं का आभार जताने पार्टी कार्यालय आए प्रधानमंत्री ने कहा, भारत की जनता की विशेषता है कि वह केवल खुद की भलाई के तराजू से किसी सरकार को नहीं तौलती। इसकी बजाय इस बात से तौलती है कि जनता की भलाई कि लिए सरकार ने कितने निष्ठापूर्ण प्रयास किए। सामान्य नागरिकों के हितों के लिए वह कितना प्रतिबद्ध रही।
उन्होंने कहा, ‘अगर हम जनता की इन कसौटियों पर खरा उतरते हैं तो देश की जनता पलक पावडे बिछा कर आपका स्वागत करती रहेगी। यह हमारी जनता की विशेषता है। इसलिए पूरी प्रतिबद्धतता और निष्ठा के साथ हमें उसके लिए काम करना होगा। जनता ने हममें जो विश्वास जताया है, उसे पूरा होना चाहिए।’

16 वीं लोकसभा के लिए हुए इन चुनावों के बारे में उन्होंने कहा, ‘यह 21वीं सदी का टनि’ग प्वाइंट (निर्णायक मोड़) बनने वाला है। 21 वीं सदी में इसका क्या प्रभाव होने जा रहा है यह शोध का विषय बनने वाला है। सामाज शास्त्रियों, राजनीतिक पंडितों और चुनाव विश्लेषकों को इसका दस्तावेज तैयार करना चाहिए।’
उन्होंने इस ‘स्नेह मिलन’ कार्यक्रम में कहा कि दुनिया और देश में अभी तक केवल एक चुनाव की चर्चा होती है जो आपातकाल लगने के बाद 1977 में हुए थे लेकिन आने वाले दिनों में विश्व भर में इस (2014) चुनाव की चर्चा होगी और देश दुनिया इससे सीखेगी। इन चुनावों में एक सामान्य अंडर करंट था। जनता स्थिर सरकार चाहती थी। स्पष्ट जनादेश चाहते थी। और ऐसा उसने कर दिखाया। (भाषा)



और भी पढ़ें :