रिजर्व बैंक आर्थिक वृद्धि पर भी ध्यान दे-चिदंबरम

अहमदाबाद| भाषा| पुनः संशोधित सोमवार, 29 जुलाई 2013 (17:49 IST)
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अहमदाबाद। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा से एक दिन पहले वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने सोमवार को कहा कि केंद्रीय बैंक का काम सिर्फ मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करना ही नहीं, बल्कि वृद्धि को प्रोत्साहित करना और रोजगार के अवसर पैदा करना भी है


वित्तमंत्री ने कहा कि उन्हें वाणिज्यिक बैंकों द्वारा ब्याज दर बढ़ाए जाने की कोई उम्मीद नहीं है, क्योंकि उनके पास ऋण की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त धन है और बड़े निवेश वाली परियोजना लाने की जिम्मेदारी उद्योग पर है।

उन्होंने कहा कि विश्वभर में सोच बदल रही है। केंद्रीय बैंक को सिर्फ मुद्रास्फीति के बारे में ही नहीं सोचना चाहिए। केंद्रीय बैंक के अधिकार को व्यापक दायरे में देखा जाना चाहिए जिसमें मूल्य स्थिरता, वृद्धि और और रोजगार के मौके बढ़ाना भी शामिल है।

चिदंबरम का यह बयान रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति की पहली तिमाही समीक्षा से एक दिन पहले आया है। उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक इस समीक्षा में भारी उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रही विनिमय दर, नकदी संकट और वृद्धि में नरमी के मुद्दे पर विचार करेगा।


रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री और चिदंबरम से मुलाकात की और समझा जाता है कि उन्होंने मौजूदा वृहद-आर्थिक स्थिति पर चर्चा की।
चिदंबरम ने यहां एक समारोह में कहा कि मैं यह कहना चाहता हूं कि केंद्रीय बैंक की मूल्य स्थिरता से जुड़ी जिम्मेदारी को हम स्वीकार करते हैं, लेकिन मूल्य स्थिरता को उसके आर्थिक वृद्धि और रोजगार बढ़ाने के व्यापक अधिकार क्षेत्र का एक हिस्सा माना जाना चाहिए।

उन्होंने स्वीकार किया कि विश्वभर में सरकारें और केंद्रीय बैंक एक ही तरीके से नहीं सोचती हैं। दरअसल, केंद्रीय बैंक और सरकार के बीच यह प्रतिरोध व्यावहारिक है, यह एक तरह से स्वस्थ प्रतिरोध है। मैं यह नहीं कह रहा कि यह गलत है, यह शायद स्वस्थ टकराव है। (भाषा)



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