आतंकवाद पर विपक्ष ने सरकार को घेरा

नई दिल्ली (भाषा)| भाषा| पुनः संशोधित बुधवार, 22 जुलाई 2009 (17:15 IST)
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को कतई बर्दाश्त नहीं करने की प्रतिबद्धता की सरकार को याद दिलाते हुए बुधवार को समूचे विपक्ष ने सरकार से लोकसभा में सवाल किया कि वह मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद पाक के साथ समग्र वार्ता प्रक्रिया से आतंकवाद के मुद्दे को कैसे अलग रख सकती है।


विपक्ष की उपनेता सुषमा स्वराज ने गृह मंत्रालय की वर्ष 2009-10 की अनुदान माँगों पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि मुंबई हमलों को एक साल भी पूरा नहीं हुआ है और प्रधानमंत्री ने मिस्र में ऐसा प्रदर्शन किया कि वे आतंकवाद के मुद्दे को अलग रखकर को चाय, आलू और प्याज बेचने के लिए तैयार हैं।
सुषमा ने जानना चाहा कि ऐसा क्या हुआ है जिसके चलते पाकिस्तान को लेकर सरकार का रुख बदल गया है क्योंकि प्रधानमंत्री ने खुद आरोप लगाया था कि मुंबई हमलों के पीछे पाकिस्तान का हाथ है।


विपक्ष की उपनेता ने कांग्रेस नीत संप्रग गठबंधन सरकार से कहा कि जिस प्रकार वह पाकिस्तान के साथ गलबहियाँ डालने का प्रयास कर रही है, वह उसे आम चुनाव में मिले जनादेश के खिलाफ है जिसमें उसने पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही थी।

कांग्रेस के संजय निरूपम ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए आतंकवाद के मुद्दे पर भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा आतंकवाद को एक समुदाय विशेष से जोड़कर देखती है, लेकिन उड़ीसा, गुजरात और मालेगाँव की आतंकवादी घटनाओं पर चुप्पी साध जाती है।

समाजवादी पार्टी के नेता ने आतंकवाद के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि तमाम खुफिया जानकारी होने के बावजूद सरकार इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक कमजोर नेतृत्व आतंकवाद के खिलाफ मजबूती के साथ कार्रवाई नहीं कर सकता।
मुलायम ने कांग्रेस पर कायरता का परिचय देने का आरोप लगाया और कहा कि एक ओर तो पाकिस्तान ने बलूचिस्तान के हालात के लिए पर दोष मढ़ा तो वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री मिस्र में पाकिस्तान के साथ संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर कर आए। उन्होंने माँग की कि भारत-पाक संयुक्त बयान पर किन परिस्थितियों में हस्ताक्षर किए गए, इस पर सदन में चर्चा कराई जाए।



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