संयंत्रों को सस्ती गैस, बिजली के दाम पर लगाम

नई दिल्ली| भाषा| पुनः संशोधित शुक्रवार, 28 जून 2013 (16:08 IST)
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नई दिल्ली। देश में निकलने वाली गैस के दाम बढ़ाकर दोगुने करने का फैसला करने के एक दिन बाद वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने शुक्रवार को संकेत दिया कि बिजलीघरों और उर्वरक संयंत्रों के लिए दाम कुछ कम रखे जा सकते हैं ताकि बिजली और रासायनिक खाद ज्यादा महंगी नहीं हो।


मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने कल शाम यहां हुई बैठक में घरेलू प्राकृतिक गैस के दाम डॉ. रंगराजन समिति की सिफारिशों के अनुरूप तय किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके अनुसार के दाम मौजूदा 4.2 डॉलर प्रति दस लाख मीट्रिक ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) से बढ़कर करीब दोगुने हो जाएंगे। गैस के दाम बढ़ने से बिजली, उर्वरक तथा वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी महंगी होगी।
वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बताया कि सीसीईए ने सभी तरह की घरेलू गैस के दाम रंगराजन समिति द्वारा सुझाए गए फॉर्मूले के अनुरूप तय किए जाने को मंजूरी दे दी। यह निर्णय देश में तेल एवं गैस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया। उन्होंने कहा घरेलू उत्पादन बढ़ाए बिना आयात पर निर्भरता बढ़ती रहेगी।

गैस महंगी होने से बिजली और उर्वरक संयंत्रों की लागत बढ़ने के बारे में पूछे जाने पर चिदंबरम ने कहा कि बिजली और उर्वरक मंत्रालय ने यह मुद्दा उठाया है, इन क्षेत्रों की लागतवृद्धि को सीमित रखने पर गौर किया जा सकता है, इस मुद्दे को आने वाले समय में देखा जाएगा।


यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार बिजली और उर्वरक संयंत्रों को गैस पर सब्सिडी देगी, जवाब में उन्होंने कहा सीसीईए ने गैस उत्पादकों के गैस के दाम को मंजूरी दी है, ग्राहकों को यह किस दाम पर मिलेगी इसका फैसला नहीं लिया है।
गैस के साधन मूल्य :विभिन्न उत्पादन कार्यों में एक साधन के रप में गैस की दरें: उचित समय पर तय की जाएगां।

चिदंबरम ने कहा कि देश में निवेश कम हो रहा है और कंपनियां विदेशों में पैसा लगा रही है। पिछले 10 साल के दौरान 27 अरब डॉलर देश से बाहर निवेश हुआ है और 10 अरब डॉलर जाने की तैयारी में है।

उन्होंने कहा उचित दाम नहीं मिलने की वजह से घरेलू गैस उत्खनन एवं उत्पादन क्षेत्र में कोई नया निवेश नहीं हुआ। परिणाम यह हुआ कि वर्ष 2010-11 में प्राकृतिक गैस का दैनिक उत्पादन 14.30 करोड़ घनमीटर से 2012-13 में दैनिक 11.14 करोड़ घनमीटर रह गया।
वित्तमंत्री ने कहा कि घरेलू स्तर पर गैस उत्पादन में कमी का मतलब विदेशों से तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के आयात में तीव्र वृद्धि होगी। इस स्थिति को ठीक करने का एक ही रास्ता है कि गैस उत्पादकों को उचित दाम मिले जिससे कि यहां निवेश बढ़े।

चिदंबरम ने कहा कि देश में आयात की जाने वाली गैस का दाम घरेलू दाम की तुलना में तीन गुणा ज्यादा पड़ता है और निरंतर गैस का आयात भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए वहनीय नहीं है।
आपके समक्ष दो विकल्प हैं या तो गैस के बिना रहना होगा और या फिर अधिक गैस का उत्पादन करना होगा। गैस का आयात का तीसरा विकल्प ज्यादा समय तक नहीं चल सकता, निरंतर आयात करते रहना मुश्किल होगा।

रंगराजन समिति ने जो फॉर्मूला सुझाया है उसके अनुसार प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खरीद बिक्री केन्द्रों और एलएनजी के दीर्घकालिक आयात सौदों के औसत मूल्य के अनुसार घरेलू गैस का दाम तय होगा। यह दाम प्रशासनिक मूल्य प्रणाली (एपीएम) के तहत बिकने वाली ओएनजीसी की गैस, रिलायंस के केजी बेसिन से निकलने वाली गैस सभी पर समान रूप से लागू होगा।
रंगराजन समिति का गैस मूल्य फॉर्मूला एक अप्रैल 2014 से लागू होकर पांच साल तक वैध होगा। (भाषा)



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