ऑस्ट्रेलिया को हराओ तो जानें...

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पर्थ के तेज विकेट पर स्पिनरों के जादू के बूते पर भले ही त्रिकोणीय सिरीज के दूसरे मैच में श्रीलंका को 4 विकेट से हराने में सफल रहा हो, लेकिन इस जीत से 'यंग इं‍डिया' का खोया हुआ आत्मविश्वास वापस लौटने वाला नहीं है। यह आत्मविश्वास तभी लौटेगा, जब भारत रविवार को ऑस्ट्रेलिया जैसी ताकतवर टीम को धराशायी करे।

आर. अश्विन की फिरकी का जादू चला

मध्यक्रम में अभी भी काफी सुधार की जरूरत

युवा क्रिकेटरों को अपना किरदार निभाना होगा

भारत कब तक पुछल्ले बल्लेबाजों के दम पर जीतता रहेगा?

पर्थ के विकेट पर आर. अश्विन ने पहले 3.2 के इकानॉमी रेट से 10 ओवर में 32 रन देकर 3 विकेट लेकर अपनी फिरकी का जादू बिखेरा और उसके बाद बल्लेबाजी में भी जौहर दिखलाते हुए नाबाद 30 रन बनाकर जीत दिलवाने में अहम किरदार निभाया।


भारत और श्रीलंका की टीमें विश्वकप 2011 के बाद पहली बार आमने-सामने थी और मैच के पहले ही इसे बराबरी का मुकाबला माना जा रहा था। जहीर खान भी विश्वकप के बाद अपना पहला वनडे मैच खेलने उतरे और 44 रन देकर 2 विकेट लेने में सफल रहे।

भारतीय स्पिनरों ने श्रीलंका को 50 ओवर में 8 विकेट पर 233 रन पर सीमित रखकर जीत की उम्मीदें जगा दी थीं। सहवाग भले ही 10 रन बनाकर फ्लॉप रहे, लेकिन सचिन तेंडुलकर ने 48 रन बनाकर अपने मनोबल को बढ़ाया। विराट कोहली ऑस्ट्रेलियाई विकेटों की तासीर को अच्छी तरह समझ चुके हैं और यदि वे 77 रन पर दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से रन आउट नहीं होते तो उनका सैकड़ा पक्का था।

कोहली के 'विराट प्रदर्शन' ने काफी हद तक धोनी की मुश्किलें आसान कर दी थीं। रविंदर जडेजा और ‍अश्विन ने कमजोर गेंदों का इंतजार किया और जीत दर्ज करके ही दम लिया। भारत को यह जीत उस वक्त मिली, जब मैच की 20 गेंदें फेंकी जाना बाकी थी और हाथ में 4 विकेट थे।


गुजरे तीन सालों में भारत ने श्रीलंका के साथ करीब 40 वनडे मैच खेले हैं और 2009 से ऐसा कोई साल नहीं रहा, जब दोनों देशों के बीच वनडे सिरीज न खेली गई हो। जाहिर है कि दोनों ही टीमें एक दूसरे की कमजोरी और मजबूती से वाकिफ थीं।
इस मान से श्रीलंका पर भारत की 4 विकेट की जीत पर बहुत ज्यादा जश्न मनाने की कतई जरूरत नहीं है। भारत को यह मैच कम से कम 7 विकेट से जीतना था। सहवाग के अलावा धोनी 4 रन, रोहित शर्मा 10 रन और सुरेश रैना 24 रन का सस्ते में आउट होना इसका सबूत है कि टीम इंडिया के युवा क्रिकेटरों को अभी और होमवर्क करना है। टीम इंडिया के हौसले तब बढ़ेंगे, जब वह ऑस्ट्रेलिया को हराएगी।
भारत को अभी भी अपने मध्यक्रम पर ध्यान देना जरूरी है। बुधवार के दिन पर्थ में यदि रविंदर जडेजा (नाबाद 24) और अश्विन (नाबाद 30) नहीं टिकते तो हो सकता था कि यहां पर हम दूसरे वनडे की हार की चर्चा कर रहे होते। श्रीलंका की मौजूदा टीम से कहीं ज्यादा ताकतवर और अनुभवी टीम इंडिया है। इसीलिए उससे उम्मीदें और बढ़ जाती हैं।

ऑस्ट्रेलिया के तेज विकेट पर भारतीय स्पिनरों को सफलता मिलना भी एक शुभ संकेत है। इस त्रिकोणीय सिरीज को अभी लंबा सफर तय करना है। यह तो तय है कि फाइनल में पहुंचने वाली एक टीम ऑस्ट्रेलिया ही होगी, लेकिन दूसरी टीम भारत या ‍श्रीलंका में से आएगी और भारत पिछली त्रिकोणीय सिरीज का चैम्पियन है, लिहाजा उसका प्रदर्शन भी चैम्पियनों जैसा होना चाहिए। अभी भी भारतीय टीम के सभी क्षेत्रों में काफी सुधार की दरकार है... (वेबदुनियन्यूज)



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