सरकार पर बरसे राहुल बजाज

नई दिल्ली| भाषा|
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नई दिल्ली। बजाज ऑटो के चेयरमैन ने अर्थव्यवस्था में सुस्ती के लिए को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि चालू वित्त वर्ष घरेलू के लिए बेहद कठिन रहेगा


कंपनी की 2012-13 की सालाना रिपोर्ट में शेयरधारकों को लिखे अपने पत्र में बजाज ने कहा है कि कांग्रेसनीत संप्रग सरकार के पहले कार्यकाल में लगातार तीन साल 9 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर हासिल करने के बावजूद भारत कठिन समय में बेहतर वृद्धि दर हासिल करने के लिए जरूरी बुनियादी तथा निवेश ढांचा तैयार नहीं कर सका।

उन्होंने कहा, सतत वृद्धि के लिए जरूरी राजमार्ग, बिजली, रेल, बंदरगाह तथा आईटी नेटवर्क पर ध्यान देने के बजाए हम खपत आधारित सब्सिडी के वित्त पोषण के लिए देश का राजकोषीय घाटा बढ़ाते रहे। इससे मुद्रास्फीति दबाव बढ़ा जिसके कारण रिजर्व बैंक को नीतिगत ब्याज दर बढ़ाने के साथ कड़ी मौद्रिक नीति का सहारा लेना पड़ा।

बजाज ने कहा कि सरकार की तरफ से निष्क्रियता तथा सरकारी कामकाज में अनिश्चितता से बिजली क्षेत्र में संकट उत्पन्न हुआ। साथ ही प्रमुख परियोजनाओं के मामले में अंतर-मंत्रालयी मंजूरी न मिलने तथा पूर्व की तारीख से करारोपण के निर्णय से उच्चतम न्यायालय के फैसले को बदलने से निवेश में कमी हुई और फलस्वरूप सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि नरम पड़ गई।

राहुल बजाज ने आगे कहा कि यह कहना आसान है कि लेहमन के बाद वैश्विक नरमी (2008-09) से आर्थिक वृद्धि में गिरावट आई है। उन्होंने कहा, यह आंशिक रूप से सच है।

उन्होंने कहा, भारत की जीडीपी बहुत हद तक घरेलू मांग पर आधारित है, न कि अंतरराष्ट्रीय बाजार पर, वहीं दूसरी तरफ चीन का निर्यात भारत से कहीं अधिक है, लेकिन उसके बावजूद उसकी वृद्धि दर वर्ष 2012 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 7.9 प्रतिशत रही।
उन्होंने कहा, यहां तक कि इंडोनेशिया की वृद्धि दर भी पिछली पांच तिमाहियों में तेज रही है। वर्ष 2012 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में उसकी वृद्धि दर 6.1 प्रतिशत रही। वित्त वर्ष 2013-14 के परिदृश्य के बारे में उन्होंने कहा, आशावादी होने के बावजूद मुझे निकट भविष्य में सुधार की किरण दिखाई नहीं देती।

वृद्धि में गिरावट भले ही अब नहीं हो रही है लेकिन वृद्धि की गति नरम है। अगर भारत 2013-14 में 6 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हासिल कर ले तो मुझे सुखद अचंभा होगा। ऐसे में मोटासाइकल के लिए घरेलू बाजार कठिन होगा। (भाषा)



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