चीन को लेकर दुनिया के देशों में बेचैनी बढ़ी

BBC Hindi|
BBC
के दुनियाभर में किए गए एक में पाया गया है कि की बढ़ती को लेकर लोगों की चिंताएँ बढ़ी हैं।

सर्वेक्षण में चीन की बढ़ती आर्थिक ताकत को खराब मानने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है, खासकर चीन से बड़े पैमाने पर कारोबार करने वाले जी-7 देशों में ऐसा मानने वालों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।

बीबीसी के लिए ये सर्वेक्षण ग्लोबस्कैन और प्रोग्राम ऑन इंटरनेशनल पोलिसी एटीट्यूट (पीआईपीए) ने किया था और इसमें 27 देशों के 28619 लोगों से दो दिसंबर, 2010 से चार फरवरी, 2011 के बीच बातचीत की गई।
पाकिस्तान के लोगों का चीन की बढ़ती ताकत के प्रति सबसे अधिक सकारात्मक नजरिया था, वहाँ ऐसी राय रखने वाले 74 फीसदी थे। लेकिन भारत में चीन की आर्थिक प्रभाव पर सकारात्मक राय रखने वालों की संख्या 2005 के 68 से घटकर 53 फीसदी हो गई है।

पाकिस्तान में चीन की सैन्य शक्ति को सराहने वालों की संख्या 61 फीसदी रही जबकि भारत में 2005 में 56 फीसदी से ये संख्या गिरकर 44 फीसदी हो गई है।
चीन को लेकर बेचैनी : बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने 2005 में भी ऐसा ही सर्वेक्षण किया था, तब से अब चीन की आर्थिक ताकत बढ़ने पर नकारात्मक रुख रखने वाले लोगों की संख्या फ्रांस में 31 से बढ़कर 53 फीसदी हो गई।

कनाडा में भी यही स्थिति है, वहाँ चीन के बारे में नकारात्मक राय रखने वाले 37 से 55 फीसदी हो गए हैं। इसी तरह जर्मनी में 44 से 53 और अमेरिका में ऐसी राय रखने वाले 45 से 54 फीसदी हो गए हैं। ब्रिटेन में ऐसे लोगों की संख्या 34 से 41 फीसदी और मैक्सिको में 18 से 43 फीसदी हो गई है।
ग्लोब स्कैन के चेयरमैन डग मिलर का कहना था, 'वर्ष 2005 की तुलना में चीन की चमत्कारिक आर्थिक प्रगति ज्यादा विवादास्पद है। आर्थिक मंदी के बाद जी7 देशों के नागरिक इस बात को लेकर अनिश्चित थे कि वे चीन से कैसे प्रतिस्पर्धा कर पाएँगे।'

अनेक देशों में चीन की आर्थिक ताकत को लेकर बढ़ती बेचैनी के बावजूद सकारात्मक रुख रखने वाले देश भी हैं। दो अफ्रीकी देश इसमें सबसे आगे हैं। नाइजीरिया में 82 फीसदी और कीनिया में 77 फीसदी लोग चीन के बारे में सकारात्मक रुख रखते हैं।
इस सर्वेक्षण में पाया गया कि बड़ी संख्या में लोग ऐसा मानते हैं कि चीन अन्य देशों के साथ कारोबार में अनुचित तरीके अपनाता है।

प्रोग्राम ऑन इंटरनेशनल पोलिसी एटीट्यूट के निदेशक स्टीवन कल का कहना था, 'ये सर्वेक्षण बताता है कि चीन की छवि अनुचित तरीके अपनाने वाले की बन रही है, इससे उससे कारोबार करने वाले बड़े देश दूर हो सकते हैं, साथ ही सैन्य क्षेत्र में विस्तार पर पड़ोसी देश चौकन्नी निगाह रख रहे हैं।'
सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वालों में से 35 फीसदी का मानना था कि चीन अपने कारोबार में अनुचित तरीके अपनाता है जबकि 28 फीसदी ने यही बात अमरीका के बारे में और 20 फीसदी ने यूरोपीय संघ के बारे में कही। अगले दस वर्षों में चीन आर्थिक महत्व के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ देगा, ऐसा बड़ी संख्या में लोग मानते हैं।

और भी पढ़ें :