तुला राशि को मंगलमय रहेगी शिवरात्रि

तंत्र साधना और साबर मंत्र सिद्धि का दिन

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महाशिवरात्रि पर शिवालयों में ' ऊँ नमः शिवाय, हर-हर महादेव' के जयघोष की गूँज सुनाई दे रही है। इस दिन का दूध व जल से अभिषेक करने से सारी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।


हर साल फाल्गुन के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार जब चतुर्दशी सायंकाल प्रदोष समय में हो, उसी दिन इस व्रत को मनाने का विशेष महत्व है। इस दिन श्रद्धालु सुबह से ही शिवालयों में पहुँच कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर शिवलिंग में दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक करते हैं। इसके बाद चंदन, रोली, अक्षत अर्पित कर भगवान को प्रसन्न करने के लिए उनके प्रिय बेलपत्र के साथ आँक और धतूरे के फूल चढ़ाते हैं त‍था महाशिवरात्रि की रात हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में रतजगा कर भजन-कीर्तन में लीन रहेंगे।

शिवरात्रि के इस महापर्व के संबंध में ज्योतिषाचार्य उद्धव श्याम केसरी ने बताया कि महाशिवरात्रि का पर्व तुला राशि वाले के लिए बहुत मंगलमय होगा। वहीं कन्या राशि वालों के लिए अति फलदायी रहेगा। ऐसे व्यक्ति जिनकी जन्म पत्रिका में बुध शत्रु है, कन्या राशि में शनि का कुप्रभाव है या तुला राशि में शनि का कुदृष्टि है, ऐसे व्यक्ति महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा कर सभी पीड़ाओं से मुक्ति पा सकेंगे।

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उन्होंने कहा कि भगवान शिव ऐसे देव हैं, जो मात्र जल अर्पण करने से ही प्रसन्न हो जाते हैं। ऊँ नमः शिवाय का जाप करते हुए पूजन करने से भगवान सदाशिव अपने भक्तों का कल्याण करते हैं। महाशिवरात्रि पूजन को विधि-विधान से किया जाए तो महादेव अतिशीघ्र प्रसन्न होते हैं।
ज्योतिषाचार्य ने पूजा-विधि एवं अभिषेक के संबंध में बताया कि दूध एवं शक्कर को शिवलिंग पर अर्पित करने से निधि और बुद्धि की प्राप्ति होती है। मधुरस से अभिषेक करने से धन की वृद्धि, घी से अभिषेक करने से वंश वृद्धि, गन्ना रस से अभिषेक करने से समस्त संकट समाप्त हो जाते हैं और पापों से मुक्ति मिलती है।

बिल्व पत्र, दुर्वा, शमी पत्र, तुलसी मंजरी, आँवला पत्र, मेड़की, चिरचिरा एवं कैथपत्र से पूजा करने को शुभ माना गया है। कमल दल, कमल फूल से पूजा करना भी शुभ है। उन्होंने कहा कि हनुमान जी को राम भक्ति चाहिए थी, सो अपनी माता की सलाह एवं प्रेरणा से उन्होंने महाशिवरात्रि में शिवलिंग की पूजा सहस्त्र कमल दल अर्पण कर प्राप्त कर ली। भगवान शिव की पूजा में खास कर केतकी एवं चंपा के पुष्प वर्जित माने गए है। इन पुष्पों से शिव का पूजन नहीं करना चाहिए।
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शिव पूजा सबसे सरल : प्रसिद्ध तंत्राचार्य और ज्योतिषाचार्य रघुवीर सिंह राठौर ने बताया कि महाशिवरात्रि में भगवान शिव की पूजा तो दिन में ही होती है, लेकिन इसमें रात्रि शब्द जोड़ने के पीछे बड़ा रहस्य है। रात्रि का अर्थ यहाँ सोने के लिए नहीं, बल्कि जागरण के लिए है। सीधा-सा अर्थ यही है कि जीव का शिव बनने के लिए साधना, आराधना के लिए उल्लेखित दिवस ही महाशिवरात्रि है। इस दिन सामान्यजन से लेकर महान साधक सभी कोई अपने-अपने ढंग से भगवान शिव की आराधना करते हैं।
शिवालय में जाकर कोई वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक करते हैं, तो कोई गेहूँ, आम के बौर, आँक, धतूरा, नारियल, धूप, दीप, आरती, स्त्रोतपाठ आदि अर्पण कर भगवान शिव को प्रसन्न करते हैं। उन्होंने बताया कि तंत्र साधना और साबर मंत्र सिद्धि का कार्य भी महाशिवरात्रि के दिन ही किया जाता है। साबर मंत्र कलयुग में इच्छापूर्ति से मोक्ष तक की संपूर्ण सफलता दिलाता है। द्वादश ज्योतिर्लिंग का पूजन, ध्यान व मानस पूजन का भी अपना अलग महत्व है।
सुबह स्नान कर मंदिर या फिर अपने घर में ही शिवलिंग स्थापित कर दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और गंगाजल से अभिषेक करते हुए पंचाक्षरी मंत्र 'ऊँ नमः शिवाय' का जप रुद्राक्ष माला के साथ यथाशक्ति से करें। साधकों को विधि अनुसार अघोर मंत्र, साबर मंत्र, गुरु द्वारा दिया गया मंत्र, कुंडली साधना मंत्र का विशेष रूप से जाप करना चाहिए।



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