विक्रम संवत 2066 में वर्षा विचार

प्रकृति
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भारत वर्ष की कुण्डली वृषभ लग्न की है। जिसके लग्नेश शुक्र है। भारत की कुण्डली में पाँच ग्रह तीसरे घर में स्थित है। सबसे शुभ ग्रह गुरु षष्ट भाव में स्थित होकर अष्टमेश व द्वादशेश से दृष्टि संबध बनाए हुए है। श्री का पूरे वर्ष का मेघेश सूर्य है। अर्थात इस वर्ष में मेघ भारत वर्ष पर अपनी कितनी कृपा दृष्टि रखेंगे।


सूर्य है क्रूर ग्रह, अग्नि का रूप, इसलिए जहाँ होते है, वहाँ अग्नि के प्रभाव से सभी नष्ट हो जाता है। जिसके फलस्वरूप इस वर्ष आकाश में मेघ सूर्य को ढँके रहेंगे। इन्द्र देव की कृपा कही-कही होगी। सूर्य की अग्नि वर्षा को सूखा देगी। जिससे 22 जुलाई के सूर्य ग्रहण से आने वाले छह महीनों तक सूखे की स्थिति रहने की संभावनाएँ बन रही है।
इस विक्रम संवत में कुछ तीन ग्रहण है। तीनों ग्रहण भारत में देखे जा सकेंगे। जिसमें दो चन्द्र ग्रह है तथा एक सूर्य ग्रह। शास्त्र के अनुसार जिस वर्ष तीन ग्रह आते है उस वर्ष प्राकृतिक आपदाएँ अवश्य आती है।

प्रकृति
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सूखा आने की संभावनाएँ इसलिए बन रही हैं, क्योंकि 22 जुलाई का सूर्य ग्रहण मकर राशि पर हुआ है। और 22 जुलाई को गुरु अपनी वक्र दृष्टि से भारत की कन्या राशि को देख रहा है। गुरु भारत वर्ष की कुण्डली में उत्तर-पूर्वी कोण दिशा के सूचक है। इसलिए इस दिशा में आने वाले सभी क्षेत्रों में सूखे की स्थिति रहेगी।

गुरु गोचर में 15 जून से 13 अक्टूबर तक वक्री रहेंगे। इस अवधि में वर्षा की स्थिति चिन्ताजनक रहेगी। उसके बाद वस्तुओं के भाव भी कम होंगे। वर्षा भी सामान्य रहेगी।



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