शयन पाद संचालन : तोंद होगी गायब और पचने लगेगा खाना

shayan pad sanchalan yoga
पुनः संशोधित शुक्रवार, 13 अगस्त 2021 (13:51 IST)
आधुनिक जीवन शैली के चलते या मोटापा एक वैश्विक समस्या बन गई है। वैसे भी लॉकडाउन के कारण अधिकतर लोग इस समस्या से गुजर रहे हैं। कब्ज, अपच या अनाप-शनाप खाने और मद्यपान से पाचन तंत्र कमजोर हो चला है और जिसके चलते अब इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो गया है। इम्यून सिस्टम के कमजोर होने से कई तरह के रोगों की उत्पत्ति होगी है। ऐसे में सबसे सरल 'शयन पाद संचालन' करें और मात्र 60 दिन में इस समस्या से मुक्ति पाएं।

पाद संचालन क्या है? : लेटी हुई अवस्था में पैरों का संचालन करना ही शयन पाद संचालन आसन है। यह ठीक उसी तरह है जबकि कोई बच्चा लेटे-लेटे साइकल चला रहा हो। यह आसन दो तरह से किया जा सकता है। पहला तरीका बहुत ही साधारण है और दूसरा तरीका स्टेप बाई स्टेप है।

पहला तरीका : पीठ के बल भूमि पर लेट जाएं। हाथ जंघाओं के पास। पैर मिले हुए। अब धीरे से पैर और हाथ एकसाथ उठाकर हाथ-पैरों से साइकल चलाने का अभ्यास करें। थक जाएं तो कुछ देर शवासन में विश्राम करके पुन: अपनी सुविधा अनुसार यह ‍प्रक्रिया करें।
स्टेप बाई स्टेप :
1. भूमि पर योगा मैट बिछाकर उस पर पीठ के बल लेट जाएं। हाथ जंघाओं के पास। पैर मिले हुए।

2. श्वास भरते हुए बाएं पैर को घुटने से सीधा रखते हुए जंघा जोड़ से ऊपर की ओर उठाएं और प्रश्वास करते हुए नीचे लाएं। इसी क्रिया को दाएं पैर से दोहराएं। आवृत्ति 10 बार दोहराएं। पूर्ण होने पर प्रारंभिक स्थिति में आएं। अल्प विश्राम करें।

3. श्वास भरते हुए दोनों पैरों को ऊपर उठाएं और प्रश्वास करते हुए पैर नीचे लाएं। प्रक्रिया को 5 बार करें। आवृत्ति पूर्ण होने पर अल्प विश्राम कर प्रारंभिक स्थिति में आएं।
4. श्वास भरते हुए पैरों को क्षमतानुसार ऊपर उठाएं। प्रश्वास करते हुए दाएं पैर को दाईं ओर और बाएं पैर को बाईं ओर ले जाएं। श्वास भरते हुए मध्य में लाएं। इस प्रक्रिया को लयबद्धता के साथ 5 बार दोहराएं।

5. आवृत्ति पूर्ण होने पर मध्य में पैरों को ऊपर ही रखें और अब एक पैर आगे और एक पैर पीछे ले जाएं। गत्यात्मक रूप से इस प्रक्रिया को 5 बार करें। आवृत्ति पूर्ण होने पर पैर धीरे से नीचे लाएं और विश्राम करें।
6. प्रारंभिक अवस्था में आएं। श्वास भरें। पैरों को जमीन से 45 के अंश पर ऊपर उठाएं। प्रश्वास करते हुए पैरों में क्षमतानुसार फासला बनाएं।

7. श्वास भरें। प्रश्वास करते हुए दोनों पैरों को अपनी-अपनी धुरी पर बाएं पैर को बाईं ओर और दाएं पैर को दाईं ओर एकसाथ गोलाकार घुमाएं। तीन बार करें, फिर विपरीत क्रम से तीन बार घुमाएं। आवृत्ति पूर्ण होने पर पैर पास-पास लाएं और प्रश्वास करते हुए धीरे से जमीन पर लाएं। अल्प विश्राम कर प्रारंभिक अवस्था में आएं।
8. प्रारंभिक अवस्था में आने के बाद बाएं पैर को जमीन से 45 के अंश पर उठाएं और नीचे की ओर लाएं। एड़ी को जमीन पर न टिकने दें। साथ-साथ दाएं पैर को उठाएं और उसे नीचे लाते समय बाएं पैर को उठाएं। इस क्रिया की लयबद्ध तरीके से 5 से 10 आवृत्ति करें। पूर्ण होने पर पैर नीचे लाकर अल्प विश्राम करें।

9. प्रारंभिक अवस्था में आएं। बाएं पैर को घुटने से मोड़ते हुए पंजे को पकड़कर अंगूठे को नासिका से स्पर्श कराएं। ध्यान रहे, गर्दन जमीन से उठे नहीं। धीरे-धीरे पैर नीचे कर प्रक्रिया को दाएं पैर से करें आवृत्ति पूरी होने पर पैर नीचे करें। अल्प विश्राम करें। 3. अब दोनों पैरों को घुटने से मोड़ते हुए दाएं हाथ से दायां पंजा, बाएं हाथ से बायां पंजा पकड़ें।
10. घुटना शरीर से बाहर की ओर रहेगा। श्वास भरें। प्रश्वास करते हुए दोनों पंजों के अंगूठों को नासिका से स्पर्श कराने का प्रयास करें। अंतिम अवस्था में कुछ क्षण रुकने के बाद पैरों को जमीन पर टिका दें। विश्राम करें।

11. प्रारंभिक स्थिति बनाएं। श्वास भरते हुए दोनों पैरों को एकसाथ हवा में जमीन से 4-6 इंच ऊपर उठाएं। क्षमतानुसार सामान्य श्वास-प्रश्वास के साथ रुकें। धीरे-धीरे पैर नीचे लाएं। अल्प विश्राम करें।
12. प्रारंभिक अवस्था में आएं। हाथों व पैरों को उठाकर लेटे-लेटे ही साइकल चलाने की तरह उन्हें गतिमान करें। एक दिशा में 5 बार चलाने के बाद दूसरी दिशा में भी यही क्रिया 5 बार दोहराएं। पूर्ण होने पर हाथ-पैर नीचे लाकर विश्राम करें।

13. प्रारंभिक अवस्था में लेटें। श्वास भरते हुए दोनों पैरों को ऊपर उठाएं। दोनों पैरों को मिलाकर रखें और एकसाथ उन्हें बाईं ओर से घुमाएं। 3 चक्कर पूर्ण होने पर दाईं ओर से क्रिया को 3 बार दोहराएं। आवृत्ति पूरी होने पर पैरों को नीचे लाकर विश्राम करें।
14. संचालनों के दौरान लयबद्धता का विशेष रूप से ध्यान रखें। 2. किसी भी प्रकार की जोर-जबर्दस्ती शरीर के साथ न करें। गर्दन को न उठाएं और पैर वापस लाते समय झटका न दें। 4. आपकी क्षमतानुसार आप जहां तक जा सकते हैं, वही आपकी अंतिम स्थिति है।

आसन का लाभ : इस आसन के नियमित अभ्यास से मोटापा दूर होगा और पाचन तंत्र संबंधी रोग दूर होंगे। यह आसन मधुमेह रोग को दूर करने में भी लाभदायक सिद्ध होगा। इससे तोंद हट जाएगी और आपका पेट पहले वाली स्थिति में होगा। इससे पेट की मांसपेशियां मजबूत होगी और कमजोर आंतों को भी शक्ति मिलेगी।
-वेबदुनिया संदर्भ



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