Year Ender 2021 : आम आदमी पर महंगाई की मार, निवेशक मालामाल, अर्थव्यवस्था पर ओमिक्रॉन का साया

नृपेंद्र गुप्ता| Last Updated: शनिवार, 1 जनवरी 2022 (10:07 IST)
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2020 की तरह ही 2021 में भी कोरोनावायरस से जिंदगी की जंग ने कारोबार जगत को बुरी तरह प्रभावित किया। कोरोना के कहर को थामने के उपाय के लिए लगाए गए लॉकडाउन और कर्फ्यू ने व्यवसाय और रोजगार दोनों पर नकारात्मक असर डाला। कोरोना संकट ने न सिर्फ अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डाला बल्कि बेरोजगारी बढ़ाने के साथ ही निवेशकों के नजरिए को भी पूरी तरह बदल डाला। 2021 में शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड्स और IPO में निवेश करने वालों को जमकर फायदा हुआ। समय-समय पर सरकार द्वारा दी गई विशेष पैकेज रूपी ऑक्सीजन ने अर्थव्यवस्था को संभाले रखा।


कोरोना की दूसरी लहर समाप्त होने के बाद रिएल एस्टेट, ऑटो सेक्टर, इलेक्ट्रॉनिक मार्केट समेत सभी क्षेत्रों में भारी तेजी दिखाई दी। चिकित्सा जगत के लिए तो यह वर्ष बेहतरीन रहा। वर्क फ्रॉम होम ट्रेंड देश में सेट हो गया। कुछ दिन स्कूल खुलने से शिक्षा जगत को ऑक्सीजन मिली तो पयर्टन जगत ने भी जुलाई के बाद राहत की सांस ली।

अर्थव्यवस्था पर ओमिक्रॉन का ग्रहण : 2021 में भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से पटरी की ओर लौटती दिखाई दी। एक समय ऐसा लग रहा था कि देश एक बार फिर विकास की राह पर तेजी से दौड़ेगा। बहरहाल कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट ने एक बार फिर रास्ता रोका। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा ने कोविड-19 वायरस के नए संस्करण ओमीक्रोन के बढ़ते खतरे के बीच 2021-22 और 2022-23 दोनों ही वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि 9-9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।
रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि महामारी के कारण 2020-23 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था को कुल 39 लाख करोड़ रुपए का नुकसान होगा। हालांकि CEBR के अनुसार, दैनिक सक्रिय मामलों में तेज गिरावट ने 2021 में आर्थिक गतिविधियों में तेज उछाल में योगदान दिया। कुल मिलाकर, 2021 में अर्थव्यवस्था में 8.5% की वृद्धि हुई है। भारत 2022 में छठा स्थान हासिल करेगा। ब्रिटिश कंसल्टेंसी की रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है कि 2022 में 100 ट्रिलियन डॉलर के स्तर को वैश्विक अर्थव्यवस्था पार कर सकती है, यदि को काबू नहीं किया गया तो 2023 या 2024 में दुनिया पर आर्थिक मंदी छा
जाएगी।

थोक महंगाई ने तोड़ा 12 साल का रिकॉर्ड : थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति नवंबर में एक दशक के उच्चतम स्तर 14.23 प्रतिशत पर पहुंच गई। तोड़ा 12 साल का रिकॉर्ड। अप्रैल से लगातार आठवें महीने थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति दहाई अंक में बनी हुई है। इस साल अक्टूबर में मुद्रास्फीति 12.54 प्रतिशत थी, जबकि नवंबर 2020 में यह 2.29 प्रतिशत थी। इसका मुख्य कारण खनिज तेलों, मूल धातुओं, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में हुई भारी वृद्धि है। पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, खाद्य तेल, आटा, दाल, हिंग, ड्राय फ्रूट्स, हेल्थ इंश्योरेंस, टर्म प्लान, कपड़े, जूते और खिलौने आदि के दामों में वृद्धि देखी गई। 2021 की विदाई के समय रिजर्व बैंक ने स्पष्ट कहा कि ओमिक्रॉन के मामले बढ़ने से देश में महंगाई बढ़ेगी।
लॉकडाउन :
2020 की तरह ही 2021 में भी कोरोना का कहर बढ़ने पर लॉकडाउन का सहारा लिया गया। हालांकि यह लॉकडाउन पूरे देश में एक साथ नहीं लगाया गया बल्कि आवश्यकतानुसार लगाया गया। कोरोना का सबसे ज्यादा असर महाराष्‍ट्र और केरल में देखा गया। इस
वजह से राजधानी मुंबई में आर्थिक गतिविधियां बूरी तरह प्रभावित हुई। बहरहाल स्थिति सामान्य होने पर आर्थिक गतिविधियां भी जल्द ही
सामान्य स्थिति में पहुंच गई। जाते जाते भी 2021 कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से डरा गया और लोगों को मन में 2022 में भी लॉकडाउन की दहशत दिखाई दी।
रिएल इस्टेट सेक्टर :
पिछले दो साल से मंदी की मार झेल रहे रियल एस्टेट सेक्टर में 2021 उम्मीद की नई किरण भर गया। बैंकों ने होम लोन की ब्याज दरों में ऐतिहासिक कटौती की, सरकार की ओर से गरीबों को मकान दिलाने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना को बढ़ावा
दिया और कई राज्यों ने स्टांप ड्यूटी में कटौती की। इस वर्ष पूरे देश में मकानों की बिक्री में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2022 में रियल एस्टेट कारोबार के पटरी पर लौटने की उम्मीद है।



शेयर बाजार : कोविड-19 महामारी की वजह से पैदा हुई अनिश्चितताओं के बावजूद 2021 में छोटी कंपनियों के शेयरों ने निवेशकों को बड़ा रिटर्न दिया है। दलाल पथ पर जोरदार तेजी के बीच इस साल छोटी कंपनियों में निवेश करने वाले निवेशकों को 60 प्रतिशत तक का रिटर्न मिला है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में ही पूरे वर्ष भारी तेजी दिखाई दी। सेंसेक्स पहली बार 61,000 के पार पहुंचा। माना जा रहा है कि नए साल में भी छोटे शेयरों का यह प्रदर्शन जारी रहेगा।

IPO बाजार में बहार : 2021 IPO बाजार के लिए शानदार कहा जा सकता है। 52 IPO से 115000 करोड़ रुपए आए जबकि 2020 में 15 IPO से 26612 करोड़ रुपए जुटाए गए थे। पारस डिफेंस, MTAR टेक्नोलॉजी, न्यूरेका, लक्ष्मी आर्गेनिक इंडस्ट्रीज, बारबेक्यू नेशन के IPO को बेहतर प्रतिसाद मिला। पेटीएम बना अब तक का सबसे बड़ा IPO, जुटाए 183 अरब रुपए। हालांकि पेटीएम के आईपीओ में निवेशकों को भारी नुकसान हुआ। शेयर इश्यू प्राइस से यह करीब 23 प्रतिशत नीचे गिरा।

गोल्ड ईटीएफ में निवेश : गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड कोषों (ईटीएफ) के प्रति निवेशकों का आकर्षण बरकरार है। नवंबर में गोल्ड ईटीएफ में 683
करोड़ रुपए का निवेश आया है। गोल्ड ईटीएफ में निवेश का आंकड़ा इस साल 4,500 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। इस साल सिर्फ जुलाई में गोल्ड ईटीएफ से 61.5 करोड़ रुपए की निकासी हुई थी।

म्यूचुअल फंड
: म्यूचुअल फंड ने वर्ष 2021 में निवेश के साधन के रूप में निवेशकों का भरोसा जीतने के साथ ही अपने प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियों (AUM) में सात लाख करोड़ रुपए का इजाफा किया। हालांकि, ओमीक्रोन के चलते हालात बिगड़ने की आशंका और ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के चलते नए साल में मुश्किलों का सामना भी करना पड़ सकता है।

इंश्योरेंस : कोरोना के बढ़ते मामलों और डेथ रेट को देखते हुए लोगों में इंश्योरेंस की प्रति रुझान बढ़ा। खासतौर पर लोग हेल्थ इंश्योरेंस और
टर्म प्लान के प्रति जागरूक हुए। हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम में काफी बढ़ोतरी हुई। वहीं नए ग्राहकों को टर्म प्लान भी काफी महंगा मिला।
2022 में भी दोनों तरह के बीमा उत्पाद काफी महंगे होने की आशंका हैं।

क्रिप्टो पर कन्फ्यूजन :क्रिप्टोकरेंसी और बिटकॉइन पूरे सालभर लोगों की जुबान पर छाया रहा। तेजी से पैसा कमाने की चाह में कई लोगों ने इसमें निवेश भी किया। शिबु इनु जैसी कई नई करेंसियों ने क्रिप्टो बाजार में अपनी धाक जमाई। बहरहाल सरकार द्वारा नियमन के दायरे में लाने की खबरों से लोगों में कन्फ्यूजन बढ़ा। बड़ी संख्‍या में लोगों ने इससे पैसा निकाला। 2021 के अंत तक कन्फ्यूजन बरकरार रहा। उम्मीद है कि 2022 में इस पर कन्‍फ्यूजन दूर हो जाएगा।

रोजगार :टीमलीज सर्विसेज के अनुसार, ई-कॉमर्स और संबद्ध उद्योगों में 2021 में रोजगार के अवसरों में 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार और आक्रामक टीकाकरण अभियान से इसमें आगे और तेजी आने की उम्मीद। ई-कॉमर्स और स्टार्टअप क्षेत्र में काफी
नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। 2022 में इन क्षेत्रों में नियुक्ति गतिविधयां 32 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं।
लॉकडाउन :
2020 की तरह ही 2021 में भी कोरोना का कहर बढ़ने पर लॉकडाउन का सहारा लिया गया। हालांकि यह लॉकडाउन पूरे देश में एक साथ नहीं लगाया गया बल्कि आवश्यकतानुसार लगाया गया। कोरोना का सबसे ज्यादा असर महाराष्‍ट्र और केरल में देखा गया। इस वजह से राजधानी मुंबई में आर्थिक गतिविधियां बूरी तरह प्रभावित हुई। बहरहाल स्थिति सामान्य होने पर आर्थिक गतिविधियां भी जल्द ही
सामान्य स्थिति में पहुंच गई। जाते जाते भी 2021 कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से डरा गया और लोगों को मन में 2022 में भी
लॉकडाउन की दहशत दिखाई दी।



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