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फेंगशुई अनुसार घर में क्रिस्टल लैंप रखने के 5 फायदे

सोमवार,सितम्बर 27, 2021
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पानी से भरी एक सुराही घर में जरूर रखनी चाहिए और वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में पानी से भरी सुराही रखने से धन की कभी कमी नहीं होती।
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मकान बनाने के पूर्व नींव खोदी जाती है और उस नींव में वास्तु के अनुसार धातु का एक सर्प और कलश रखा जाता और फिर नींव रखी जाती है। आखिर ऐसा क्यों करते हैं आओ जानते हैं इस संबंध में संक्षिप्त जानकारी। भगवान् शिवजी के आभूषण तो नाग है ही। लक्ष्मण और बलराम ...
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हमें पुराणों में वास्तुदेवता की उत्पत्ति की कुछ कथाएं मिलती है। नया घर बनाने के पूर्व और बन जाने के बाद वास्तुदेव की पूजा की जाती है। वास्तुशास्त्र में वास्तुदेव का बहुत महत्व बताया गया है। आओ जानते हैं वास्तुदेव की जन्म कथा।
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चांदी सबसे शुभ और शीतल धातु मानी गई है। उसी तरह शुभ और मंगलमयी प्रतीकों में मोर,गाय,हाथी,शेर के अलावा मछली को भी शामिल किया गया है...। आइए जानते हैं चांदी की मछली का महत्व और चलते हैं एक ऐसी जगह जहाँ की चांदी की मछली देश-विदेश में मशहूर है....
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यदि घर में दिन-प्रतिदिन कलह बढ़ रहा हो। हर काम में बाधा आ रही हो। तो निश्चय ही जानना चाहिए कि घर अशुद्ध है। इन समस्याओं का निपटारा हो सकता है। प्रस्तुत है घर को पवित्र और शुद्ध रखने का यह पौराणिक उपाय ....
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फेंगशुई चीन का वास्तु शास्त्र है। इस में भवन निर्माण और भवन में रखी जाने वाली पवित्र वस्तुओं के बारे में विस्तार से जानकारी मिलती है। फेंग और शुई का शाब्दिक अर्थ है वायु और जल। यह शास्त्र भी पंचतत्वों पर ही आधारित है। आओ जानते हैं सैंकड़ों वस्तुओं ...
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फेंगशुई चीन का वास्तु शास्त्र है। इस में भवन निर्माण और भवन में रखी जाने वाली पवित्र वस्तुओं के बारे में विस्तार से जानकारी मिलती है। फेंग और शुई का शाब्दिक अर्थ है वायु और जल। यह शास्त्र भी पंचतत्वों में पर ही आधारित है। आओ जानते हैं सैंकड़ों ...
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फेंगशुई चीन का वास्तु शास्त्र है। इस में भवन निर्माण और भवन में रखी जाने वाली पवित्र वस्तुओं के बारे में विस्तार से जानकारी मिलती है। फेंग और शुई का शाब्दिक अर्थ है वायु और जल। यह शास्त्र भी पंचतत्वों में पर ही आधारित है। आओ जानते हैं सैंकड़ों ...
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फेंगशुई चीन का वास्तु शास्त्र है। इस में भवन निर्माण और भवन में रखी जाने वाली पवित्र वस्तुओं के बारे में विस्तार से जानकारी मिलती है। फेंग और शुई का शाब्दिक अर्थ है वायु और जल। यह शास्त्र भी पंचतत्वों में पर ही आधारित है। आओ जानते हैं सैंकड़ों ...
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फेंगशुई चीन का वास्तु शास्त्र है। इस में भवन निर्माण और भवन में रखी जाने वाली पवित्र वस्तुओं के बारे में विस्तार से जानकारी मिलती है। फेंग और शुई का शाब्दिक अर्थ है वायु और जल। यह शास्त्र भी पंचतत्वों में पर ही आधारित है। आओ जानते हैं सैंकड़ों ...
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फेंगशुई चीन का वास्तु शास्त्र है। इस में भवन निर्माण और भवन में रखी जाने वाली पवित्र वस्तुओं के बारे में विस्तार से जानकारी मिलती है। फेंग और शुई का शाब्दिक अर्थ है वायु और जल। यह शास्त्र भी पंचतत्वों में पर ही आधारित है। आओ जानते हैं सैंकड़ों ...
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फेंगशुई चीन का वास्तु शास्त्र है। इस में भवन निर्माण और भवन में रखी जाने वाली पवित्र वस्तुओं के बारे में विस्तार से जानकारी मिलती है। फेंग और शुई का शाब्दिक अर्थ है वायु और जल। यह शास्त्र भी पंचतत्वों में पर ही आधारित है। आओ जानते हैं सैंकड़ों ...
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फेंगशुई चीन का वास्तु शास्त्र है। इस में भवन निर्माण और भवन में रखी जाने वाली पवित्र वस्तुओं के बारे में विस्तार से जानकारी मिलती है। फेंग और शुई का शाब्दिक अर्थ है वायु और जल। यह शास्त्र भी पंचतत्वों में पर ही आधारित है। आओ जानते हैं सैंकड़ों ...
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फेंगशुई चीन का वास्तु शास्त्र है। इस में भवन निर्माण और भवन में रखी जाने वाली पवित्र वस्तुओं के बारे में विस्तार से जानकारी मिलती है। फेंग और शुई का शाब्दिक अर्थ है वायु और जल। यह शास्त्र भी पंचतत्वों में पर ही आधारित है। आओ जानते हैं सैंकड़ों ...
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फेंगशुई चीन का वास्तु शास्त्र है। इसमें भवन निर्माण और भवन में रखी जाने वाली पवित्र वस्तुओं के बारे में विस्तार से जानकारी मिलती है। फेंग और शुई का शाब्दिक अर्थ है वायु और जल। यह शास्त्र भी पंचतत्वों में पर ही आधारित है। आओ जानते हैं सैंकड़ों ...
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फेंग शुई चीन का वास्तु शास्त्र है। इस में भवन निर्माण और भवन में रखी जाने वाली पवित्र वस्तुओं के बारे में विस्तार से जानकारी मिलती है। फेंग और शुई का शाब्दिक अर्थ है वायु और जल। यह शास्त्र भी पंचतत्वों में पर ही आधारित है। आओ जानते हैं सैंकड़ों ...
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चायनीज ज्योतिष फेंगशुई में विंड चाइम का बहुत महत्व है। भारत में भी इसका उपयोग प्राचीन काल से ही होता आया है। आओ जानते हैं कि यह क्या होती है और क्या है इसके 5 खास चमत्कारिक फायदे।
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दस दिशाएं होती हैं। पूर्व, आग्नेय, दक्षिण, नैऋत्य, पश्‍चिम, वायव्य, उत्तर, ईशान, ऊर्ध्व और अधो। ऊर्ध्व का अर्थ होता है उपर। दिशा में जहां दिशा शूल होता है, वहीं राहु काल भी नुकसानदायक है। दूसरी ओर, प्रत्येक दिशा के दिग्पाल होते हैं और उनके ग्रह ...
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नियमित रूप से श्री गणेश की आराधना करने से घर अथवा दुकान/कार्यालय में वास्तु दोष उत्पन्न होने की संभावना बहुत कम होती है।
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