आधी-अधूरी तैयारियों के बीच होगा माघ मेले का पहला स्नान

Last Updated: शुक्रवार, 8 जनवरी 2021 (17:08 IST)
प्रयागराज। दिव्य और भव्य कुंभ के बाद पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना और पौराणिक सरस्वती के विस्तीर्ण रेती पर 14 जनवरी से शुरू हो रहे माघ मेले में श्रद्धालुओं को पहला मकर संक्रांति का स्नान आधी-अधूरी तैयारियों के बीच करना पड़ेगा।
ALSO READ:

मकर संक्रांति 2021 : मकर राशि में सूर्य का प्रवेश, कितना जानते हैं आप सूर्य को?
कल्पवासी मकर संक्रांति से शुरू होने वाले मेले में की रेती पर महीनेभर जप, तप और ध्यान करेंगे। कोविड के चलते इस बार मेले का क्षेत्रफल घटाकर 538.34 हैक्टेयर कर दिया गया है। मेला क्षेत्र को 4 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। हालांकि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इसके क्षेत्रफल में बढ़ोतरी करने के लिए कहा है। मेला शुरू होने में मात्र 5 दिन का समय रह गया है। तंबुओं की आध्यात्मिक नगरी में अभी भी कई विभागों के कार्य होने बाकी हैं।
जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी ने कई बार मेला समीक्षा बैठक कर निर्देशित कर चुके हैं कि पारदर्शिता के साथ कार्यों को समय से पूरा किया जाए। गत बुधवार एडीएम (सिटी) अशोक कन्नौजिया ने भी मेला समीक्षा बैठक कर संबंधित विभाग के अधिकारियों को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दे चुके हैं। स्नान घाट, पीडब्ल्यूडी व जलकल समेत कई विभागों के कार्य अभी अधूरे हैं। माघ मेला क्षेत्र में बिजली विभाग की ओर से 12 हजार स्ट्रीट लाइटें लगाने का लक्ष्य मिला हुआ है। 11 हजार 800 स्ट्रीट लाइटें लगाने का काम पूरा किए जाने की बात कही जा रही है जबकि झूंसी तरफ बहुत से खंभे बिना तार के खड़े दिखलाई पड़ रहे हैं।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कोरोना को लेकर जिला प्रशासन मेला आयोजन को लेकर ऊहापोह में था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद मेला बसाने की तैयारी शुरू की गई जिस कारण सारा काम पिछड़ गया है। उन्हें विश्वास है कि स्नान से पहले सारा काम पूरा हो जाएगा। मेला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि माघ मेला कल्पवासियों और साधु-संतों का होता है। हमारा भरसक प्रयास होता है कि उन्हें किसी प्रकार से पहले सुविधा मुहैया कराएं लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण को लेकर चौकसी बरती जा रही है।
गंगा में प्रतिदिन स्नान करने वाले दारागंगज निवासी रामेश्वर पाण्डेय ने बताया कि दशाश्वमेध घाट तथा शास्त्री पुल के नीचे का जल देखने से ही हकीकत बयां हो जाती है। जगह-जगह पानी कम होने के कारण टापू-सा नजर आ रहा है। माघ मेला का पहला पौष पूर्णिमा स्नान 14 जनवरी को है। यह स्नान अव्यवस्थाओं और आधी-अधूरी तैयारियों के बीच ही होगा। मेला क्षेत्र में अभी पूरा काम नहीं हो सका है। 1 सप्ताह से कम समय रह गया है लेकिन बावजूद इसके झूंसी का पूरे क्षेत्र में अभी केवल बिजली के खंभे खड़े होने के साथ कहीं-कहीं आधे-अधूरे तंबुओं का शिविर खड़ा है। मेला क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं अभी पूरी तरह से व्यवस्थित नहीं हैं। शौचालयों की व्यवस्था भी आधी-अधूरी है। (वार्ता)



और भी पढ़ें :