आज है स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि, 10 Quotes जो सोच बदल देंगे आपकी

Swami Vivekananda

आज की पुण्यतिथि है। स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) एक आध्यात्मिक गुरु एवं समाज सुधारक थे। उनका नाम नरेंद्र दत्त था। विवेकानंद कहते थे कि 'युवा' किसी भी देश की सबसे बहुमूल्य संपत्ति होता हैं। उन्होंने कहा था, अगर युवाओं की उन्नत ऊर्जा को सही दिशा प्रदान कर दी जाए तो राष्ट्र के विकास को नए आयाम मिल सकते हैं। विवेकानंद जी के कई ऐसे हैं, जो हमें अपनी सोच बदलने पर मजबूर कर देंगे।


आपके लिए यहां प्रस्तुत हैं पढ़ें विवेकानंद जी के 10 अनमोल विचार-Vivekanand 10 Famous quotes

1. उठो, जागो और तब तक नहीं रुको, जब तक कि लक्ष्य न प्राप्त हो जाए।

2. ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हमी हैं, जो अपनी आंखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है।
3. लोग तुम्हारी स्तुति करें या निंदा, लक्ष्मी तुम्हारे ऊपर कृपालु हो या न हो, तुम्हारा देहांत आज हो या एक युग में, तुम न्यायपथ से कभी भ्रष्ट न हो।


4. किसी बात से तुम उत्साहहीन न होओ; जब तक ईश्वर की कृपा हमारे ऊपर है, कौन इस पृथ्वी पर हमारी उपेक्षा कर सकता है? यदि तुम अपनी अंतिम सांस भी ले रहे हो तो भी न डरना। सिंह की शूरता और पुष्प की कोमलता के साथ काम करते रहो।
5. आज्ञा पालन करो। सत्य, मनुष्य, जाति और अपने देश के पक्ष पर सदा के लिए अटल रहो और तुम संसार को हिला दोगे। याद रखो- व्यक्ति और उसका जीवन ही शक्ति का स्रोत है, इसके सिवाय अन्य कुछ भी नहीं।

6. कभी मत सोचिए कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है। ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है। अगर कोई पाप है, तो वो यही है; ये कहना कि 'तुम निर्बल हो या अन्य निर्बल हैं।

7. हे विद्वन! डरो मत; तुम्हारा नाश नहीं हैं, संसार-सागर से पार उतरने का उपाय है। जिस पथ के अवलंबन से यती लोग संसार-सागर के पार उतरे हैं, वही श्रेष्ठ पथ मैं तुम्हें दिखाता हूं!
8. हे सखे, तुम क्यों रो रहे हो? सब शक्ति तो तुम्हीं में हैं। हे भगवन्, अपना ऐश्वर्यमय स्वरूप को विकसित करो। ये तीनों लोक तुम्हारे पैरों के नीचे हैं। जड़ की कोई शक्ति नहीं प्रबल शक्ति आत्मा की है।

9. यह जीवन अल्पकालीन है, संसार की विलासिता क्षणिक है, लेकिन जो दूसरों के लिए जीते हैं, वे वास्तव में जीते हैं।

10 अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है अन्यथा ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाए, उतना बेहतर है।

Swami Vivekananda



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