सिंहस्थ और दान : किंचित दान का महत्व


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इस दान का मंत्र यह है -
 
 
पुरी निलप स्वामिन भक्त संकष्ट नाशनं।
किंचिद्दानेन में देव प्रसन्नो भव माधव॥ 
 
ब्राह्मण की बात सुनकर यमराज ने उसे किया, तब ब्राह्मण रूपधारी वेणीमाधव स्वयं अपने स्वरूप में यमराज के सामने प्रकट हो गए। यमराज ने उन्हें प्रणाम किया। वेणीमाधव ने उन्हें मनचाहा वरदान दिया।> >

 



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