0

गुरु नानक देव की 10 सीख जीवन बदल देगी

बुधवार,सितम्बर 22, 2021
0
1
भारत में सिख पंथ का अपना एक पवित्र एवं अनुपम स्थान है सिखों के प्रथम गुरु, गुरुनानक देव सिख धर्म के प्रवर्तक हैं। उन्होंने अपने समय के भारतीय समाज में व्याप्त कुप्रथाओं, अंधविश्वासों, जर्जर रूढ़ियों और पाखंडों को दूर करते हुए प्रेम, सेवा, परिश्रम, ...
1
2
गुरु नानक देव सिख धर्म के संस्थापक और सिखों के पहले गुरु है। उनका अवतरण संवत्‌ 1469 में कार्तिक पूर्णिमा के दिन माता तृप्ता देवी जी और पिता कालू खत्री जी के घर हुआ था।
2
3
22 september Guru nanak dev ji ki punyatithi : भारतीय संस्कृति में गुरु का महत्व आदिकाल से ही रहा है। सिख धर्म के दस गुरुओं की कड़ी में प्रथम हैं गुरु नानक। गुरु साहिबजी से परमात्मा तक, मोक्ष तक या आत्मज्ञान को प्राप्त करने के एक नए मार्ग की परंपरा ...
3
4
कहते हैं कि 27 अगस्त 1604 में अमृतसर के हरमंदिर साहिब में गुरु ग्रंथ साहिब की प्रतिस्थापना की गई थी। आओ जानते हैं इस संबंध में खास 5 बातें। हालांकि कुछ जगहों पर यह भी उल्लेख मिलता है कि ग्रंथ साहिब की स्थापना 16 अगस्त को हुई थी।
4
4
5
सिखों धर्म के आठवें गुरु, गुरु हर किशन सिंह जी का जन्म श्रावण कृष्ण नवमी तिथि को सन् 1656 ई. में कीरतपुर साहिब में हुआ था।
5
6
सिख समुदाय में छठवे गुरु, गुरु हर गोविंद साहिब जी का प्रकाश पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। सिखों के छठवे गुरु, गुरु हर गोविंद सिंह जी का जन्म बडाली (अमृतसर, भारत) में हुआ था।
6
7
बार-बार की जीत और गुरु के अत्यधिक भरोसे के कारण पाइंदे खां का सिर घूम गया। वह सार्वजनिक रूप से अपने बारे में बढ़-चढ़कर बातें करने लगा और सारी सफलताओं
7
8
श्री गुरु अर्जन देव साहिब सिख धर्म के 5वें गुरु है। वे शिरोमणि, सर्वधर्म समभाव के प्रखर पैरोकार होने के साथ-साथ मानवीय आदर्शों को कायम रखने के लिए आत्म बलिदान करने वाले एक महान आत्मा थे।
8
8
9
सिखों के तीसरे गुरु, गुरु अमर दास जी का जन्म वैशाख शुक्ल 14वीं, 1479 ई. में अमृतसर के 'बासर के' गांव में पिता तेजभान एवं माता लखमीजी के घर हुआ था। गुरु अमर दास जी बड़े आध्यात्मिक चिंतक थे।
9
10
गुरु अंगद साहिब यानी लहणा जी का जन्म तिथि के अनुसार वैसाख वदी 1 को पंजाब के फिरोजपुर में हरीके नामक गांव में हुआ था। उनके पिता श्री फेरू जी एक व्यापारी
10
11
सिख धर्म के दस गुरुओं की कड़ी में प्रथम हैं गुरु नानकदेवजी। भारतीय संस्कृति में गुरु का महत्व आदिकाल से ही रहा है। कबीर साहब जी ने कहा था कि गुरु बिन ज्ञान न होए साधु बाबा। तब फिर ज्यादा सोचने-विचारने की आवश्यकता नहीं है बस गुरु के प्रति समर्पण कर ...
11
12
गुरु अर्जुन देव जी की निर्मल प्रवृत्ति, सहृदयता, कर्तव्यनिष्ठता तथा धार्मिक एवं मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण भावना को देखते हुए गुरु रामदासजी ने 1581 में पांचवें गुरु के रूप में उन्हें गुरु गद्दी पर सुशोभित किया।
12
13
गुरु तेग बहादुर सिंह एक क्रांतिकारी युग पुरुष थे। विश्व इतिहास में धर्म एवं मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग बहादुर साहब का स्थान अद्वितीय है।
13
14
गुरु तेग बहादुर सिंह का जीवन समस्त मानवीय सांस्कृतिक विरासत की खातिर बलिदान था। धर्म उनके लिए सांस्कृतिक मूल्यों और जीवन विधान का नाम था।
14
15
आध्यात्मिक महापुरुष गुरु हर राय जी सिख धर्म के सातवें गुरु थे। उनका जन्म 16 जनवरी, 1630 को हुआ था। वे एक महान योद्धा भी थे।
15
16
गुरु गोविंद सिंहजी एक आध्यात्मिक गुरु थे, जिन्होंने मानवता को शांति, प्रेम, एकता, समानता एवं समृद्धि का रास्ता दिखाया।
16
17
सिख धर्म के 10वें गुरु गुरु गोविंद सिंह ने धर्म की रक्षा के लिए जो कार्य किया उसे कोई भी नहीं भूला सकता है। गुरु गोविंद सिंह जी ने इसके अलावा सिख धर्म को एक स्थापित संगत बनाया और संपूर्ण देश में गुरुओं की परंपरा को आगे बढ़ाया। आओ जानते हैं उनके ...
17
18
श्री गुरु गो‍बिंद सिंह जी का जन्म पौष सुदी 7वीं सन् 1666 को पटना में माता गुजरी जी तथा पिता श्री गुरु तेगबहादुर जी के घर हुआ।
18
19
आपके जीवन के बारे में लिखते समय यह समझ में नहीं आता है कि आपका जीवन किस पक्ष में लिखा जाए। अगर आपको एक पुत्र के रूप में देखा जाए तो
19