सावन का आखिरी सोमवार है आज, सुखमय जीवन के लिए भगवान शिव से मांगें ये शुभ वरदान

Last Updated: सोमवार, 16 अगस्त 2021 (13:41 IST)
आज 16 अगस्त 2021 को का है। सावन का महीना शिवजी को बहुत प्रिय है। उसमें भी सोमवार का दिन शिव पूजा के लिए विशेष दिन होता है। इस दिन शिवजी को प्रसन्न करके सुखमय जीवन के लिए भगवान शिव से मांगे ये शुभ वरदान।

1. शिव पुराण कथा के अनुसार शिव ही ऐसे भगवान हैं, जो शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्तों को मनचाहा वर दे देते हैं। शिवलिंग की महिमा बताते हुए कहा कि शिवलिंग में मात्र जल चढ़ाकर या बेलपत्र अर्पित करके भी शिव को प्रसन्न किया जा सकता है। इसके लिए किसी विशेष पूजन विधि की आवश्यकता नहीं है।

2. यदि आपके ऊपर किसी भी प्रकार का कर्ज है तो शिवजी के कर्ज से मुक्ति का वरदान मांगे। इसके लिए जपें 'ॐ नमो भगवते गंगरुद्राय स्वाहा''।

3. शिवजी अकाल मृत्यु से बचने का वरदान देते हैं। उनसे अकाल मृत्यु से बचने का वरदान मांगे। इसके लिए जपें महामृत्युंजय मंत्र।

4. शिवजी से विद्या और बुद्धि का वरदान मांगे। इसके लिए जपें- ॐ नमो भगवते व्याघ्ररुद्राय स्वाहा

5. भाग्य में आ रही रुकावट को दूर करने के लिए शिवजी से भाग्योदय का वरदान मांगे। इसके लिए जपें- ॐ नमो भगवते व्योमरुद्राय स्वाहा"

6. शिवजी से दरिद्रता दूर कर धन समृद्धि पाने के लिए वरदान मांगे। इसके लिए जपें- ॐ नमो भगवते मणिरुद्राय स्वाहा


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मनचाहा वरदान पाने के लिए सावन सोमवार की पूजा : पांच उपचार- गंध, पुष्प, धूप, दीप और नेवैद्य से उनकी पूजा करने के साथ ही स्तुति और चालीसा पढ़ें।

1. सावन सोमवार के व्रत में भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा की जाती है।

2. सोमवार के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें।

3. उसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति स्थापित कर उनका जलाभिषेक करें।

4. फिर शिवलिंग पर दूध, फूल, धतूरा आदि चढ़ाएं। मंत्रोच्चार सहित शिव को सुपारी, पंच अमृत, नारियल एवं बेल की पत्तियां चढ़ाएं। माता पार्वती जी को सोलह श्रृंगार की चीजें चढ़ाएं
5. इसके बाद उनके समक्ष धूप, तिल के तेल का दीप और अगरबत्ती जलाएं।
6. इसके बाद ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।

7. पूजा के अंत में शिव चालीसा और शिव आरती का पाठ करें।

8. पूजा समाप्त होते ही प्रसाद का वितरण करें।

9. शिव पूजा के बाद सोमवार व्रत की कथा सुननी आवश्यक है।

10. व्रत करने वाले को दिन में एक बार भोजन करना चाहिए।
11. दिन में दो बार (सुबह और सायं) भगवान शिव की प्रार्थना करें।

12. संध्याकाल में पूजा समाप्ति के बाद व्रत खोलें और सामान्य भोजन करें।




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