सावन का चौथा सोमवार : 16 अगस्त 2021 को क्या है पूजा के शुभ मुहूर्त, संयोग, राहुकाल और पंचांग


16 अगस्त 2021 को का सोमवार है। सावन मास में सोमवार के व्रत का विशेष महत्व है। सोमवार का दिन और भगवान शिव को विशेष प्रिय है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है....
पंचांग के अनुसार 16 अगस्त को सावन का आखिरी सोमवार है. इस दिन भगवान शिव का पूजा का विशेष संयोग बन रहा है.....

सावन सोमवार पंचांग (16 August 2021, Panchang)

16 अगस्त, सोमवार को प्रात: 07 बजकर 47 मिनट पर श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी की तिथि का समापन होगा।
इसके बाद नवमी की तिथि आरंभ होगी। सावन सोमवार पर अष्टमी और नवमी की तिथि का विशेष संयोग बन रहा है। सावन में आखिरी सोमवार को विशेष माना गया है। इस दिन व्रत रखकर विधि पूर्वक भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। पूजा में शुभ मुहूर्त का भी ध्यान रखना चाहिए। इस दिन भोलेनाथ का अभिषेक करना अच्छा माना गया है। सावन के अंतिम सोमवार में भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

पंचांग और संयोग
सावन का महीना 22 अगस्त 2021 को समाप्त हो रहा है। इसके बाद भाद्रपद मास आरंभ होगा। पंचांग के अनुसार 22 अगस्त 2021, रविवार को श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को सावन का मास समाप्त होगा। इस दिन शोभन योग का निर्माण हो रहा है। पूर्णिमा की तिथि में चंद्रमा मकर राशि में मौजूद रहेगा। जहां पर न्याय के देवता शनि देव वक्री होकर गोचर कर रहे हैं।शनि और चंद्रमा की युति से विष योग बनता है।ज्योतिष शास्त्र में इसे अच्छा योग नहीं माना गया है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार, सावन सोमवार के दिन प्रात: 07 बजकर 47 मिनट पर श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी की तिथि का समापन होगा और इसके बाद नवमी की तिथि आरंभ होगी। ऐसे में सावन के आखिरी सोमवार पर अष्टमी और नवमी की तिथि का विशेष संयोग बन रहा है। वहीं चंद्रमा वृश्चिक राशि में स्थित होंगे। यानी सोमवार के दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में विराजमान रहेगा.... इस दिन अनुराधा नक्षत्र रहेगा....
सावन सोमवार में राहु काल का विशेष ध्यान रखना चाहिए। राहु काल को अशुभ योग माना गया है। इस योग में पूजा और शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं।

राहुकाल का समय
16 अगस्त को राहु काल का समय प्रात: 07 बजकर 32 मिनट से प्रात: 09 बजकर 09 मिनट तक रहेगा।

अभिजीत मुहूर्त
इस दिन अभिजीत मुहूर्त प्रात: 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक है। माना जाता है कि इस समय कोई भी कार्य करने पर विजय प्राप्त होती है।

चौथा सोमवार संयोग:
16 अगस्त को श्रावण मास चतुर्थ सोमवार है। इस दिन अनुराधा नक्षत्र, ब्रह्म योग, वरियान और मानस नाम का औदायिक योग है। इस दिन के व्रत से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होगा।

पूजा का शुभ समय
प्रातः 5.40 से 7.20,9.20 से 10.45 अमृत,शुभ के चौघड़िया में।
अपराह्न 3.45 से सांय 7.15 तक लाभ,अमृत के चौघड़िया में।
सावन सोमवार व्रत विधि
सुबह दिन जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प करें। फिर शिव मंदिर जाकर भोलेनाथ का गंगा जल चढ़ाएं। साथ ही माता पार्वती और नंदीजी को भी गंगाजल या दूध चढ़ाएं। पंचामृत से रुद्राभिषेक करें, बिल्व पत्र अर्पित करें। भगवान शिव को उनकी प्रिय चीजें भांग-धतूरा, चंदन, अक्षत चढ़ाएं। प्रसाद के रूप में भगवान शिव को घी शक्कर का भोग लगाएं। धूप, दीप से गणेश जी की आरती करें। अंत में भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद का वितरण करें। शाम को पूजा के बाद व्रत खोलकर सात्विक भोजन ग्रहण करें।
भगवान भोले भंडारी को बिल्व पत्र बहुत ही प्रिय होता है। मान्यता है जो भी शिवलिंग पर नियमित रूप से बिल्व पत्र चढ़ाता है उसकी हर तरह की मनोकामना पूरी होती है। इसके अलावा भगवान शिव को शमी के पत्ते पसंद होते हैं इसलिए सावन के हर दिन शिवलिंग पर शमी के पत्ते जरूर चढ़ाएं। भगवान शिव का दूध और गंगाजल से अभिषेक करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।

शिवजी को प्रिय हैं ये चीजें
भगवान को कनेर, बेला और चमेली का फूल बहुत ही प्रिय होता है। बेला के पुष्पों से पूजन करने पर भगवान शिव, विवाह करने की इच्छा रखने वालों को मनोनुकूल वर और वधू प्रदान करते हैं। चमेली के सुगन्धित पुष्पों से शिव की पूजा करने से वाहन सुख मिलता है। चमेली के फूल चढ़ाने से अच्छे वस्त्रों की अभिलाषा पूरी होती है। सावन के महीने में शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाने से जीवन में सभी तरह की सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।




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