महाकाल की नगरी उज्जैन में बनेगा विश्‍व रिकॉर्ड, सायरन बजते ही जलेंगे 21 लाख दीपक

Last Updated: सोमवार, 28 फ़रवरी 2022 (09:56 IST)
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Mahashivratri Deepotsav 2022: उज्जैन, महाशिवरात्रि महाकाल नगरी। 1 मार्च 2022 को इस बार शिवरात्रि का पर्व भव्य पैमाने पर मनाया जाएगा। 1 मार्च को 'शिव ज्योति अर्पणम' महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। जिस तरह दीपावली पर अयोध्या में 9.41 लाख दीये जलाकर एक इतिहास रच दिया था, उसी तरह अब इस बार महाशिवरात्रि पर महाकाल बाबा की नगरी में 21 लाख दीपक जलाकर तथा में नाम दर्ज कराने की योजना बन गई है।




17 हजार कार्यकर्ता संभालेंगे कमान : पहले तय था कि 5 हजार शिवभक्त 21 लाख दीपकों से शहर को जगमगाएंगे। बात में तय हुआ कि दीयों को लगाने के लिए 12 हजार स्वयंसेवक भाग लेंगे। इसके लिए जिला पंचायत, शिक्षा विभाग, नगर निगम और स्मार्ट सिटी को जिम्मेदारी दी गई है। सामाजिक संगठनों, स्टूडेंट्स और दूसरे धर्मों से जुड़े लोगों को भी शामिल किया गया है। समितियां भी बनाई गई हैं। क्षिप्रा किनारे एक हजार दीपक लगाकर रिहर्सल भी की गई। एक आदमी करीब 100 दीपक लगा सकेगा। यह भी बताया जा रहा है कि लगभग 17 हजार से अधिक स्वयंसेवकों ने पंजीयन कराया है। इनमें विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि, विद्यार्थी, खिलाडी, व्यवसायिक एवं सामाजिक संगठन, धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, सभी अखाड़ों के संतगण, शामिल है। प्रमुख आयोजन स्थल रामघाट पर दीप प्रज्वलन की व्यवस्था के लिए ब्लॉक और सेक्टर बनाए गए हैं। प्रत्येक सेक्टर में स्वयंसेवकों को नियुक्त किया गया है। इनके साथ पर्यवेक्षक भी रहेंगे।
सायरन बजते ही जलेंगे दीये : सभी दीपक एक साथ संध्या वंदन के समय यदि करीब 7 बजे शिप्राजी की छोटी आरती के समय जलाए जाएंगे। दीपक जलाने के पहले सायरन बजेगा और वॉलंटियर दीपक जलाना शुरू कर देंगे।

सभी दीपक एक घंटे तक जलेंगे : सभी दीपक करीब एक घंटे तक जलेंगे। इसके लिए स्वयंसेवकों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है। महाकाल मंदिर को भी दीपों से सजाया जाएगा। महाशिवरात्रि पर प्रतिवर्ष इस मंदिर में बाबा महाकाल के दर्शन करने के लिए लगभग 5 लाख से भी ज्यादा शिवभक्त आते हैं।
यहां जलेंगे दीपक : पहले शहर में 11 से 15 लाख दीप जलाने की योजना थी लेकिन अब 21 लाख दीप जलाए जाएंगे। महाशिवरात्रि पर शिप्रा नदी के भूखी माता मंदिर घाट से लेकर रामघाट तक 12 लाख दीपक लगाए जाएंगे। तीन लाख दीपक अलग-अलग जगहों, घरों और प्रतिष्ठानों में लगेंगे। कुल 21 लाख दीप जलाने के लिए अयोध्या की तरह घाटों पर मार्किंग की है। उज्जैन के घाटों पर 12 लाख, महाकाल मंदिर में 51 हजार, फ्रीगंज टॉवर पर एक लाख, शहर के मंगलनाथ, चिंतामन मन, कालभैरव, भूखी माता, गढ़ कालिका, सिद्धवट, हरसिद्धि मंदिर सहित अन्य मंदिरों पर भी दीपक जलाए जाएंगे। इसके अलावा प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर दीप जलाए जाएंगे। नगर के नागरिक भी अपने घरों पर 5-5 दीप प्रज्वलित करेंगे। नागरिकों द्वारा उज्जैन नगर निगम के माध्यम से संकल्प पत्र भी भरे गए हैं।
यहां बनाए गए हैं दीपक : कलेक्टर सिंह ने कहा कि दीपक बनाने के टेंडर निकाले थे जो उज्जैन, देवास और इंदौर में भी बनाए जा रहे हैं। सभी जगहों से दीपकों को एकत्रित करके उज्जैन में लाया जा रहा है।

21 लाख दीपक करेंगे एक साथ प्रज्वलित : पहले शहर में 11 से 15 लाख दीप जलाने की योजना थी लेकिन अब 21 लाख दीप जलाए जाएंगे। महाशिवरात्रि पर शिप्रा नदी के भूखी माता मंदिर घाट से लेकर रामघाट तक 12 लाख दीपक लगाए जाएंगे। तीन लाख दीपक अलग-अलग जगहों, घरों और प्रतिष्ठानों में लगेंगे।
mahakal shringar
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वर्ल्ड रिकॉर्ड की रिहर्सल : कलेक्टर सिंह ने कहा कि गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड के अफसरों से संपर्क किया गया है। इस कार्यक्रम को रिकॉर्ड के रूप में दर्ज करने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड्स की टीम भी उज्जैन पंहुच चुकी है। कार्यक्रम में शाम सात बजे सायरन बजते ही दीपक एकसाथ जलाए जाएंगे। सभी दीपक करीब एक घंटे तक जलेंगे। इसके लिए स्वयं सेवकों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
महाशिवरात्रि दीपोत्सव की तैयारियों में 21 फरवरी को टीम महाकाल व हरिओम जल अर्पण की महिलाओं के संयुक्त तत्वावधान में अन्नक्षेत्र स्थित मंदिर में लगभग 300 दीप प्रज्वलित कर पर्व की तैयारियों का अभ्यास किया गया था। मंदिर अधिकारी गण जूनवाल, द्विवेदी, उदेनिया व आर.के. तिवारी के साथ ही हरिओम जल मंडल की सदस्याओं ने योजनाबद्ध दीप प्रज्वलित किए। जूनवाल ने कहा कि हजारों दीप एक साथ प्रकाशित हों इस हेतु विभिन्न टीमें बनाकर जिम्मेदारी सौंपी गई है। जनसहयोग की पराकाष्ठा के फलस्वरूप तन-मन-धन से सभी उत्साहित होकर सहयोग कर रहे हैं तथा दीप काफी देर तक लगातार प्रकाशित हों यह सुनिश्चित कर रहे हैं।
आएगा 40 लाख का खर्चा : उज्जैन के सूत्रों के अनुसार दीये प्रज्वलित करने के लिए तेल, मिट्टी के दीये और बाती आदि को मिलाकर लगभग 40 लाख रुपए का खर्च आ सकता है। जिसमें करीब 1500 तेल के डिब्बे लगने की संभावना है। 4 लाख रुपए की रुई की बाती भी आएगी।

'जीरो वेस्ट' को लक्ष्य बनाकर होगा महोत्सव : शिव ज्योति अर्पणम महोत्सव में 'जीरो वेस्ट' को लक्ष्य बनाकर कार्यक्रम की रुपरेखा बनाई गई है। स्वयंसेवकों के पहचानपत्र क्यूआर कोड एप के माध्यम से रीसायकल पेपर से बनाए जायेंगे। महोत्सव के पश्चात् दीयों का होम कम्पोस्टिंग, मटके, कुल्लड़ आदि बनाने उपयोग किया जाएगा। कार्यक्रम पश्चात् बचे हुए तेल का गौशाला आदि में इस्तेमाल किया जाएगा।
तेल की खाली बोतलों का 3-R प्रक्रिया के माध्यम से पुनः उपयोग होगा। मोमबत्तियों को जलाने के लिए पेपर मैच बॉक्स का इस्तेमाल किया जाएगा। खाने-पीने के लिए केवल जैव-निम्नीकरणीय कटलरी, प्लेट का उपयोग किया जाएगा। आयोजन के सभी घटक मंत्रालय द्वारा जारी किए गए दिशानिर्देश के (जीरो बेस्ट कार्यक्रम मानक संचालन प्रक्रिया-एसओपी) अनुसार ही तय किए जा रहे हैं।

: शहर के मंत्री, विधायक, सांसद समेत अफसरों ने लोगों से अपील की है कि महाशिवरात्रि पर घरों और प्रतिष्ठानों में दीपक जरूर लगाएं। मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह की इच्छा है कि इस बार महाशिवरात्रि पर उज्जैन में 'दीपोत्सव 2022' का आयोजन किया जाए। इसी के मद्देनजर शहर में एक साथ 11 लाख दीपकों को विभिन्न स्थानों पर जलाया जाएगा।



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