शीतला अष्टमी 2020 : जानिए शीतला पूजन के बारे में 15 विशेष बातें

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* मां शीतला स्वच्छता की अधिष्ठात्री देवी हैं।


* सभी शीतल वस्तुओं पर इनका आधिपत्य है।

* मां शीतला को पथवारी भी कहते हैं।

* देवी मां रास्ते में भक्तों को सुरक्षित रख पथभ्रष्ट होने से बचाती हैं।

* गलत मार्ग पर जाने से पहले अदृश्य रूप से चेतावनी देती हैं।

* बसौड़ा वाले दिन सुबह ठंडे पानी से नहाना चाहिए।

* जिन माताओं के बच्चे अभी माता का दूध पीते हो उन्हें बसौड़ा के दिन नहाना नहीं चाहिए।

* मां शीतला को समर्पित बसौड़ा पर्व को शीतला सप्तमी कहा जाता है, मतातंर से कुछ लोग इसे अष्टमी के दिन बनाते हैं।

* रोगों को दूर करने वाली मां शीतला का वास वट वृक्ष में माना जाता है, अतः इस दिन वट पूजन भी किया जाता है।

* इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलता है और न ही घर में ताजा भोजन बनाया जाता है।

* एक दिन पूर्व भोजन बनाकर रख दिया जाता है और अगले दिन शीतला पूजन के उपरांत सभी बासी भोजन ग्रहण करते हैं। यह ऐसा व्रत है जिसमें बासी भोजन चढ़ाया व ग्रहण किया जाता है।

* गुड़गांव में मां शीतला का मंदिर है। महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य यहीं पर कौरव और पांडवों को अस्त्र-शस्त्र विद्या का ज्ञान दिया करते थे।

* इस दिन विशेष ध्यान रखा जाता है कि परिवार का कोई भी सदस्य गलती से भी गरम भोजन न ग्रहण करें।

* मां शीतला यश देती हैं, गलत राह पर जाने से रोकती हैं।

* इस व्रत से संकटों से मुक्ति मिलती है, यश-कीर्ति-मान-सम्मान में वृद्धि होती है।




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