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भुवनेश्वरी जयंती : माता भुवनेश्वरी के 10 अनजाने रहस्य

शनिवार,सितम्बर 18, 2021
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भगवान गणेशजी को भारतीय धर्म और संस्कृति में प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। उनकी पूजा के बगैर कोई भी मंगल कार्य शुरू नहीं होता। सभी मांगलिक कार्य में पहले गणेश जी की स्थापना और स्तुति की जाती है। आओ जानते हैं भगवान गणेशजी के संबंध में संपूर्ण परिचय।
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ऐसे कई देवी और देवता हैं जिनके अष्ट कुल या अष्टावतार या अष्ट अवतार या स्वरूप हैं। आओ जानते हैं उनके नाम।
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शीतलाष्टमी देशभर में अलग-अलग जगह पर शुक्ल और कृष्ण पक्ष की तिथियों पर मनाया जाता है। इस पर्व को बसोरा भी कहते हैं। बसोरा का अर्थ है बासी भोजन। शीतला माता की पूजा के दिन घर में चूल्हा नहीं जलता है। इसीलिए बाजी भोजन करने की परंपरा है। आओ जानते हैं ...
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भगवान श्रीविष्णु के 24 से अधिक अवतार लिए हैं। हालांकि 24 और 10 अवतारों की अधिक चर्चा होती है। इन 24 में से ही एक है हंसावतार या हंस अवतार। आओ जानते हैं कि इस अवतार की क्या है 10 रोचक बातें
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भगवान महेश को ही महेश्वर कहा जाता है। यह त्रिदेवों में से एक है। आओ जानते हैं कि भगवान महेश का रहस्य क्या है।
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हिन्दू धर्म में प्रकृति का बहुत महत्व बताया गया है। हिन्दू धर्म के सभी त्योहार प्रकृति से ही जुड़े हुए हैं। प्रकृति से हमें फल, फूल, सब्जी, कंद-मूल, औषधियां, जड़ी-बूटी, मसाले, अनाज, जल आदि सभी प्राप्त होते ही हैं। इसलिए भी इसका संवरक्षण करना जरूरी ...
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माता कालिका के अनेक रूप हैं जिनमें से प्रमुख है- 1.दक्षिणा काली, 2.शमशान काली, 3.मातृ काली और 4.महाकाली। इसके अलावा श्यामा काली, गुह्य काली, अष्ट काली और भद्रकाली आदि अनेक रूप भी है। सभी रूपों की अलग अलग पूजा और उपासना पद्धतियां हैं। आओ जानते हैं ...
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लक्ष्मीजी 8 अवतार बताए गए हैं:- महालक्ष्मी, जो वैकुंठ में निवास करती हैं। स्वर्गलक्ष्मी, जो स्वर्ग में निवास करती हैं। राधाजी, जो गोलोक में निवास करती हैं। दक्षिणा, जो यज्ञ में निवास करती हैं। गृहलक्ष्मी, जो गृह में निवास करती हैं। शोभा, जो हर वस्तु ...
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देवकुल में मुख्‍यत: 33 देवताओं का समूह हैं। इन 33 देवताओं के अलावा मरुद्गणों और यक्षों आदि को देव गणों के समूह में शामिल किया गया है। त्रिदेवों ने सभी देवताओं को अलग-अलग कार्य पर नियुक्त किया है। वर्तमान मन्वन्तर में ब्रह्मा के पौत्र कश्यप से ही ...
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अक्सर मन में यह विचार आता है कि सूर्य ग्रह है या देवता। देवता है तो ग्रह कैसे हो सकता है? आओ जानते हैं कि सूर्य देव कौन हैं और कैसे हैं।
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क्या ईश्वर को नहीं मानने वाले दुख पाते हैं और मानने वाले सुख पाते हैं? नहीं, दरअसल ईश्वर को मानने वाले कई लोग पापी हैं और नहीं मानने वाले कई लोग पुण्यात्माएं हैं। तब ऐसे में ईश्वर किसकी ओर रहेगा?
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ॐ नम: शिवाय। माता सती और पार्वती के पति भगवान शंकर कब हुए थे। कितने हजार वर्ष पूर्व हुए थे और क्या है उनके पौराणिक एवं पुरातात्विक प्रमाण? आओ जानते हैं इस संबंध में कुछ खास।
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दूसरे धर्मों में उल्लेख मिलता है कि ईश्वर एक ही है। उसका एक पुत्र है। उसने सृष्टि की रचना की। वह सातवें आसमान पर रहता है। वह सभी का न्यायकर्ता है। वह फैसला करेगा। वह पापियों को दंड और पुण्य लोगों को स्वर्ग देगा। ऐसी कई बाते हैं जो ईश्वर को ...
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देवियों में त्रिदेवी, नवदुर्गा, दशमहाविद्या और चौसठ योगिनियों का समूह है। हिन्दू धर्म में सैंकड़ों देवियां हैं। उनमें से कुछ प्रजापतियों की पुत्रियां हैं, तो कुछ स्यंभू हैं और कुछ अन्य किसी देवता की पत्नियां हैं। अधिकतर देवियों को भगवान शंकर की ...
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भारत में कई समाज या जाति के कुलदेवी और देवता होते हैं। इसके अलावा पितृदेव भी होते हैं। भारतीय लोग हजारों वर्षों से अपने कुलदेवी और देवता की पूजा करते आ रहे हैं। कुलदेवी और देवता को पूजने के पीछे एक गहरा रहस्य है, जो बहुत कम लोग जानते होंगे। आओ जानते ...
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ब्रह्म ही सत्य है। 'एकं एवं अद्वि‍तीय' अर्थात वह एक है और दूसरे की साझेदारी के बिना है- यह 'ब्रह्मसूत्र' कहता है। वेद, उपनिषद और गीता ब्रह्मसूत्र पर कायम है। ब्रह्मसूत्र का अर्थ वेद का अकाट्‍य वाक्य, ब्रह्म वाक्य। ब्रह्मा को आजकल ईश्वर, परमेश्वर या ...
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हिन्दू पुराणों में भगवान शिव के ‍जीवन का जो चित्रण मिलता है वह बहुत ही विरोधाभासिक और न समझ में आने वाला लगता है, लेकिन शोधार्थियों के लिए यह मुश्किल काम नहीं है। हालांकि समाज के मन में उनके नाम, जीवन और अन्य बातों को लेकर कोई स्पष्ट तस्वीर नजर नहीं ...
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हालांकि ईश्वर तो गुणातीत और गुणरहित है फिर भी लिखने में ऐसा ही आता है कि ईश्वर है तो उसके क्या गुण है? यहां प्रस्तुत है इसके बारे में संक्षिप्त जानकारी।
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प्राचीन काल से ही भारत में साधु और संतों के प्रति बहुत आदर और सम्मान रहा है। एक ओर जहां भारत में देवी, देवताओं और भगवानों के मंदिर बने तो दूसरी और सिद्ध ऋषि और मुनियों के समाधि स्थल भी बने।
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