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मंदिरों में क्यों लगाते हैं घंटियां

सोमवार,सितम्बर 5, 2022
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हिन्दू धर्म और ज्योतिष के अनुसार सूर्यास्त के बाद कुछ ऐसे कार्य होते हैं जिन्हें नहीं करना चाहिए। उन्हें करने से घर में रोग, शोक और संकट पैदा होते हैं और साथ ही देवी लक्ष्मी रूठ जाती है। आओ जानते हैं उन्हीं कार्यों में से 10 ऐसे कार्य जिन्हें भूलकर ...
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कई लोग घर पर नियमित पूजा और आरती करते हैं। पूजाघर के कुछ नियम होते हैं जिनका पालन करना चाहिए। जैसे की घर का मंदिर किसी दिशा में बनाए या पूजा की थाली किस दिशा में रखें। किस तरह पूजा करें और कौन कौनसी पूजा सामग्री का उपयोग करें। उसी तरह घर के मंदिर ...
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रविवार की दिशा पूर्व है किंतु गुरुवार की दिशा ईशान है। ईशान में ही देवताओं का स्थान माना गया है। यात्रा में इस वार की दिशा पश्चिम, उत्तर और ईशान ही मानी गई है। इस दिन पूर्व, दक्षिण और नैऋत्य दिशा में यात्रा त्याज्य है। गुरुवार की प्रकृति क्षिप्र है। ...
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Moli kalava dhaga : मौली को कलावा, मणिबंध, रक्षासूत्र, चंद्रमौली, लाल धागा, नाड़ा, संकल्पसूत्र या मणिबंध कहते हैं। 'मौली' का शाब्दिक अर्थ है 'सबसे ऊपर'। मौली का तात्पर्य सिर से भी है। मौली को कलाई में बांधने के कारण इसे कलावा भी कहते हैं। इसका वैदिक ...
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Bhojan ke niyam: भोजन करने को लेकर हिन्दू शास्त्रों और आयुर्वेद में कुछ नियम और सेहत से जुड़ी जरूरी बातों को बताया गया है। प्राचीनकाल से ही इन बातों का सभी पालन करते आएं हैं परंतु आधुनिककाल में यह सबकुछ छूट गया है। अब लोग पाश्चात्य भोजन स्टाइल को ...
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Tulsi and Gangajal : हिन्दू धर्म में गंगाजल और तुलसी का मिलन बहुत ही पवित्र माना जाता है। गंगा जहां शिव से संबंध रखती है वहीं तुलसी श्रीहिर विष्णु से। दुनिया के सभी जलों में सबसे पवित्र जल गंगा के जल को माना जाता है और तुसली को सबसे पवित्र पौधा माना ...
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Puja ghar vastu : घर का पूजाघर या मंदिर बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। इसमें नियम अनुसार ही मूर्तियां, पूजा सामग्री या अन्य वस्तुएं रखना चाहिए। घर के मंदिर या पूजाघर में से तुरंत हटाएं ये 5 वस्तुएं और रखें 7 पवित्र वस्तुएं।
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Mandir me ghanti kyu bajate hai scientific reason : घंटे या घंटियां 4 प्रकार की होती हैं:- 1.गरूड़ घंटी, 2.द्वार घंटी, 3.हाथ घंटी और 4.घंटा। मंदिर या घर के पूजाघर में आपने देखा होगा गरुड़ घंटी को, जिसे पूजा या आरती करते वक्त बजाया जाता है। आओ जानते ...
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5 June Environment Day : एकेश्वरवादी धर्म के लोगों को लिए यह बात बड़ी अजीब लगती है कि हिन्दू धर्म के लोग वृक्ष की पूजा क्यों करते हैं (Worship of Nature in Hinduism) जबकि वह कोई ईश्‍वर या भगवान नहीं है? दरअसल, हिन्दुइज्म यह मानता है कि इस ब्रह्मांड ...
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प्रत्येक माह में दो चतुर्थी होती है। इस तरह 24 चतुर्थी और प्रत्येक तीन वर्ष बाद अधिमास की मिलाकर 26 चतुर्थी होती है। सभी चतुर्थी की महिमा और महत्व अलग-अलग है। आओ जानते हैं चतुर्थी का व्रत करने के 5 लाभ।
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माह में 2 एकादशियां होती हैं अर्थात आपको माह में बस 2 बार और वर्ष के 365 दिनों में मात्र 24 बार ही नियमपूर्वक एकादशी व्रत रखना है। हालांकि प्रत्येक तीसरे वर्ष अधिकमास होने से 2 एकादशियां जुड़कर ये कुल 26 होती हैं।
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Tirtha yatra: हिन्दू धर्म के 10 महत्वपूर्ण कर्तव्य हैं- 1.संध्यावंदन, 2.व्रत, 3.उत्सव, 4.दान, 5.संस्कार, 6.यज्ञ, 7.तीर्थ, 8.वेदपाठ, 9.सेवा और 10. धर्म प्रचार। इसमें से चार धाम तीर्थ यात्रा और नदी परिक्रमा करना बहुत जरूरी है। तीर्थ करना है पुण्य कर्म ...
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तुलसी के विभिन्न प्रकार के पौधे मिलते हैं- जैसे श्रीकृष्ण तुलसी, लक्ष्मी तुलसी, राम तुलसी, भू तुलसी, नील तुलसी, श्वेत तुलसी, रक्त तुलसी, वन तुलसी, ज्ञान तुलसी आदि। आओ जानते हैं कि हिन्दू धर्म में क्या है तुसली का महत्व।
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सिर के पहनावे को कपालिका, शिरस्त्राण, शिरावस्त्र या शिरोवेष कहते हैं। यह कपालिका कई प्रकार की होती है। प्रत्येक प्रांत में यह अलग-अलग किस्म, नाम, रंग और रूप में होती है। राजा-महाराजाओं के तो एक से एक स्टाइल के टोप, पगड़ी या मुकुट हुआ करते थे लेकिन ...
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मंदिर या घर के पूजाघर में आपने देखा होगा गरुड़ घंटी को। मंदिर के द्वार पर और विशेष स्थानों पर घंटी या घंटे लगाने का प्रचलन प्राचीन काल से ही रहा है। घंटी विशेष प्रकार का नाद होता है जो आसपास के वातावरण को शुद्ध करता है।
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हिन्दू धर्म में पीपल, आम, बड़, गूलर एवं पाकड़ के पत्तों को ही शुभ और पवित्र 'पञ्चपल्लव' कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य में इन पत्तों को कलश में स्थापित किया जाता है या पूजा व अन्य मांगलित कार्यों में इनका अन्य तरीकों से उपयोग होता है। आम के पत्तों ...
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घर या मंदिर में पूजा करने के लिए कुछ विशेष सामग्री का होना जरूरी है। उन सभी को मिलाकर ही पूजा की जाती है। हालांकि पूजा सामग्री तो बहुत सारी होती है, लेकिन यहां प्रस्तुत है पूजा के 20 प्रतीक वस्तुएं।
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प्राचीनकाल में संध्योपासना या संध्यावंदन की जाती थी। आगे चलकर यह पूजा, आरती और तरह तरह की पूजा विधियों में बदल गई। अब मोटे तौर पर कह सकते हैं कि संध्योपासना के 5 प्रकार हैं- 1. प्रार्थना, 2. ध्यान-साधना, 3. भजन-कीर्तन 4. यज्ञ और 5. पूजा-आरती। इसमें ...
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प्रत्येक माह में 2 चतुर्दशी और वर्ष में 24 चतुर्दशी होती है। चतुर्दशी को चौदस भी कहते हैं। इस दिन व्रत और पूजा करने का बहुत महत्व माना गया है। आओ जानते हैं इस तिथि की 5 खास बातें।
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