जानिए, शिवलिंग का रहस्य (वीडियो)

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
हमें फॉलो करें
आसमानी पत्थर : ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार विक्रम संवत के कुछ सहस्राब्‍दी पूर्व संपूर्ण धरती पर उल्कापात का अधिक प्रकोप हुआ। आदिमानव को यह रुद्र (शिव) का आविर्भाव दिखा। जहां-जहां ये पिंड गिरे, वहां-वहां इन पवित्र पिंडों की सुरक्षा के लिए मंदिर बना दिए गए। इस तरह धरती पर हजारों शिव मंदिरों का निर्माण हो गया। उनमें से प्रमुख थे 108 ज्योतिर्लिंग।
शिव पुराण के अनुसार उस समय आकाश से ज्‍योति पिंड पृथ्‍वी पर गिरे और उनसे थोड़ी देर के लिए प्रकाश फैल गया। इस तरह के अनेक उल्का पिंड आकाश से धरती पर गिरे थे। कहते हैं कि मक्का का संग-ए-असवद भी आकाश से गिरा था। > हजारों पिंडों में से प्रमुख 12 पिंड को ही ज्‍योतिर्लिंग में शामिल किया गया। हालांकि कुछ ऐसे भी हैं जिनका निर्माण स्वयं भगवान ने किया। > गौरतलब है कि हिन्दू धर्म में मूर्ति की पूजा नहीं होती, लेकिन शिवलिंग और शालिग्राम को भगवान का विग्रह रूप माना जाता है और पुराणों के अनुसार भगवान के इस विग्रह रूप की ही पूजा की जानी चाहिए। शिवलिंग जहां का प्रतीक है तो शालिग्राम भगवान विष्णु का।

शिव पुराण में क्या लिखा है जानिए अगले पन्ने पर...



और भी पढ़ें :