एक ही रेखा पर हैं काबा और काशी और बीच में...?

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
 
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धरती के उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध के बीच 3 काल्पनिक रेखाएं खींची गई है:- 1. कर्क रेखा, 2. भूमध्य रेखा और 3. मकर रेखा। भारत के प्राचीन ऋषि-मुनियों को खगोल विज्ञान की अधिक जानकारी थी। उन्होंने अपनी इस जानकारी को वास्तुरूप देने के लिए वहां-वहां मंदिर या मठ बनवाए, जहां का कोई न कोई खगोलीय या प्राकृतिक महत्व था। इसी क्रम में उन्होंने कर्क रेखा पर ज्योतिर्लिंगों की स्थापना की। उज्जैन के राजा वि‍क्रमादित्य ने उक्त ज्योतिर्लिंगों को भव्य आकार दिया था। भारत के महान सम्राट थे। कहा जाता है कि उनके द्वारा किए गए महान कार्यों के पन्नों को पहले बौद्धकाल, फिर मध्यकाल में फाड़ दिया गया। सम्राट विक्रमादित्य के काल में भारत विज्ञान, कला, साहित्य, गणित, नक्षत्र आदि विद्याओं का विश्वगुरु था।> > विक्रम संवत के अनुसार विक्रमादित्य आज से 2285 वर्ष पूर्व हुए थे। विक्रमादित्य का नाम विक्रम सेन था। नाबोवाहन के पुत्र राजा गंधर्वसेन भी चक्रवर्ती सम्राट थे। गंधर्वसेन के पुत्र विक्रमादित्य और भर्तृहरी थे। कलि काल के 3000 वर्ष बीत जाने पर 101 ईसा पूर्व सम्राट विक्रमादित्य का जन्म हुआ। उन्होंने 100 वर्ष तक राज किया। -(गीता प्रेस, गोरखपुर भविष्यपुराण, पृष्ठ 245)।
माना जाता है कि विक्रमादित्य का शासन मध्य एशिया तक फैला था। विक्रमादित्य के बारे में प्राचीन अरब साहित्य में वर्णन मिलता है। विक्रमादित्य की प्रतिद्वंद्विता रोमन सम्राट से चलती थी। कारण था कि उसके द्वारा यरुशलम, मिस्र और सऊदी अरब पर आक्रमण करना और विक्रम संवत के प्रचलन को रोकना था। बाद में रोमनों ने विक्रम संवत कैलेंडर की नकल करके रोमनों के लिए एक नया कैलेंडर बनाया।

ज्योतिर्विदाभरण अनुसार (ज्योतिर्विदाभरण की रचना 3068 कलि वर्ष (विक्रम संवत् 24) या ईसा पूर्व 33 में हुई थी) विक्रम संवत् के प्रभाव से उसके 10 पूर्ण वर्ष के पौष मास से जुलियस सीजर द्वारा कैलेंडर आरंभ हुआ, यद्यपि उसे 7 दिन पूर्व आरंभ करने का आदेश था। विक्रमादित्य ने रोम के इस शककर्ता को बंदी बनाकर उज्जैन में भी घुमाया था (78 ईसा पूर्व में) तथा बाद में छोड़ दिया। रोमनों ने अपनी इस हार को छुपाने के लिए इस घटना को बहुत घुमा-फिराकर इतिहास में दर्ज किया जिसमें उन्हें जल दस्युओं द्वारा उनका अपहरण करना बताया गया तथा उसमें भी सीजर का गौरव दिखाया है।

विक्रमादित्य के काल में अरब में यमन, सबाइन, इराक में असुरी, ईरान में पारस्य और भारत में आर्य सभ्यता के लोग रहते थे। माना जाता है कि यह 'असुरी' शब्द ही 'असुर' से बना है। कहते हैं कि इराक के पास जो सीरिया है, वह भी असुरिया से प्रेरित है।

 

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