धर्म 2010 : बेनतीजा रही बहस

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योग का विरोध :
हालाँकि इस सबके बीच जहाँ अमेरिका और योरप में योग का पुरजोर विरोध हुआ वहीं वहाँ के चर्चों ने योग को अपनाया भी है। इस सबके चलते पहले कि अपेक्षा वर्ष 2010 में वहाँ योगा क्लासों की तादाद और बढ़ गई। अब अमेरिका और भारत में योग को हिंदू धर्म से अलग किए जाने के लिए नए-नए तर्क जुटाए जा रहे हैं। लेकिन भारतीय मूल के कुछ अमेरिकी लोग अमेरिका में जो 'टेक बैक योगा' नाम से एक अभियान चला रहे हैं उसका असर तो अगले वर्ष ही देखने को मिलेगा। योग गुरु दीपक चोपड़ा इस अभियान को हिंदू कट्टरता कहकर खारिज करते हैं। इस बीच बाबा रामदेव ने घोषणा की कि मैं योग के बल पर 150 वर्ष जिंदा रहूँगा।

जर्मन में :
उधर सितंबर-अक्टूबर में जर्मनी में इस्लाम पर जोरदार बहस हुई। जर्मन राष्ट्रपति क्रिश्टियान वुल्फ का कहना है कि इस्लाम जर्मनी का हिस्सा है। चाँसलर अंगेला मैर्केल उनसे सहमत हैं, लेकिन उनका कहना है कि मुसलमानों को महिला और पुरुषों की समानता जैसे जर्मन आधारभूत मूल्यों का पालन करना चाहिए। राष्ट्रपति के इस बयान पर पुरा मुल्क बहस कर रहा है।

बहस चलती रहेगी उसी तरह की इस्लाम में टैटू बनवाना जायज है या नाजायज? बहुतेरे ऐसे रिवाज, परंपरा और फैशन है जिसे इस्लाम के मुल्ला जायज या नाजायज ठहराते रहते हैं और इस पर बहस चलती रहती है।

इस्लाम पर बहस :
हालाँकि इस्लाम पर बहस नई नहीं है और भी मुल्कों में बहुत तरह कि बहस चलती रही है। मसलन की यह बहस तो सभी मुल्कों में जारी है कि इस्लाम और आतंकवाद का क्या रिश्ता है या कि इस्लाम का आतंक से कोई नाता नहीं है। बहुत लोग मानते हैं कि आतंकवाद के कारण पुरी ‍दुनिया में इस्लाम की छवि खराब हो गई है। कुछ कहते हैं कि यह बुनियादी रूप से ऐसा ही है।

इस्लाम की कथित आलोचना करती फिल्म की पटकथा लिखने की वजह से खतरे के साए में जी रहीं हॉलैंड की राजनेता और धर्म की प्रमुख आलोचक 'अयान हिरसी अली' का मानना है कि इस्लाम पर व्यापक बहस होनी चाहिए और दुनिया भर में उसकी ‘व्यवस्थित समीक्षा’ की जानी चाहिए।

ग्राउंड जीरो विवाद :
अमेरिका में तो इस्लाम को लेकर जोरदार बहस चलती ही रहती है। हालाँकि पिछले पूरे वर्ष यही चलता रहा की ग्राउंड जीरो के नजदीक मस्जिद बने या नहीं बने। ग्राउंड जीरो वह जगह है जहाँ पर 9/11 के शहीदों का स्मारक बना है।

न्यूयॉर्क के मेयर माइकल ब्लूमबर्ग मुस्लिम समुदाय की धार्मिक आजादी के फेवर में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी मस्जिद बनाने का खुलकर समर्थन किया था जिसके चलते उनकी लोकप्रियता घटती गई। लेकिन ग्राउंड जीरो के पास 13 मंजिला मस्जिद बनाए जाने का जोरदार विरोध करने वाले एक चर्च ने तो कुरआन की प्रतियाँ जलाने की धमकी तक दे दी थी। हालाँकि मामला अभी ठंडे बस्ते में है।

गौरतलब है कि न्यूयॉर्क की एक मुस्लिम स्वयंसेवी संस्था कोरडोबा इंस्टीटयूट ने ग्राउंड जीरो पर मस्जिद निर्माण की यह योजना बनाई है। मस्जिदें तो पाकिस्तान में बहुत है, लेकिन कट्टरपंथ के चलते अहमदिया समुदाय और शियाओं की मस्जिदों पर शुक्रवार की नमाज के दौरान जो हमले हुए हैं उसके चलते अब तक सैंकड़ों निर्दोष मुसलमान मारे गए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में आतंकवाद का शिकार मुसलमान ही अधिक हुआ है।

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अयोध्या विवाद :
इधर भारत में राम जन्मभूमि और बाबरी ढाँचे को लेकर 30 सितंबर को लखनऊ हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया। फैसला आने की तारिख के बाद दंगे भड़कने की आशंका से पूरा देश सहमा-सहमा सा रहा और कॉमनवेल्थ भी शुरू होने वाले थे। लेकिन कोर्ट ने विवादित स्थल को तीन हिस्से में बाँट दिया। पहला राम जन्मभूमि, दूसरा मस्जिद के लिए और तीसरा निर्मोही अखाड़ा के लिए।

तीनों इस बात के लिए खुश नहीं थे कि जो बँटवारा हुआ वह सही हुआ बल्कि इसके लिए खुश थे कि दंगे नहीं हुए। इसीलिए चारों तरफ सौहार्द की चर्चा होने लगी, लेकिन धीरे-धीरे तीनों ही सुप्रीम कोर्ट की शरण में चले गए। उधर संघ ने पूरे भारत वर्ष में जहाँ पथ संचलन के माध्यम से मंदिर मुद्दे के प्रति जहाँ लोगों को जाग्रत करने का प्रयास किया वहीं

पोप की परेशानी :
अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'| Last Updated: गुरुवार, 30 अक्टूबर 2014 (17:41 IST)
टोरंटो में 26 नवंबर को आयोजित एक सम्मेलन में पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और लेखक क्रिस्टोफर हिचेन्सन के बीच धर्म पर बहस हुई। टोनी ब्लेयर ने कहा कि इराक पर अमेरिकी हमले को समर्थन देने के उनके फैसले में उनकी धार्मिक आस्थाओं की कोई भूमिका नहीं थी।लेखक हिचेन्सन ने तर्क दिया कि 'धर्म लोगों को उनकी आस्था की आड़ में वह सब करने के लिए बाध्य करता है जिसके बारे में कहा नहीं गया हो' अर्थात् हम कह सकते हैं कि धर्म की आड़ में जायज और नाजायज सभी तरह के कार्य सदियों से होते रहे हैं।पूरे साल धर्म, धार्मिकता और जातिवाद पर बहस होती रही। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा मुसलमान है या ईसाई, यह भी बहस का विषय बना रहा। दुनिया भर में कहीं भी हुए चुनाव में जातिवाद बनाम विकास के मुद्दे पर भी बहस होती रही। यह बहस उसी तरह होती रही जैसे कि हमेशा यह बहस की जाती रही है।
पूरे वर्ष कैथोलिक चर्च के प्रमुख पोप बेनेडिक्ट 16वें बहुत परेशानी में रहे। पोप पर आरोप था कि पोप बनने से पहले म्यूनिख का आर्कबिशप और वैटिकन की आस्था सभा (कॉन्ग्रेगेशन ऑफ फेथ) का प्रमुख रहते हुए उन्होंने बाल यौन शोषण के दोषी पादरियों का बचाव किया था। 2001 में अमेरिका और आयरलैंड में ऐसे कई मुकदमे हुए जिनमें आरोप लगाया गया था कि पादरियों ने बच्चों का यौन शोषण किया और उनके वरिष्ठों ने उन मामलों को रफा-दफा करके परोक्ष रूप से ऐसे आपराधिक आचरण को बढ़ावा दिया। इसका खुलासा 2010 में हुआ। हालाँकि पोप अपने बयानों को लेकर आए दिन चर्चा में बने ही रहते हैं। हाल ही में उन्होंने आखिरकार कह ही दिया की कंडोम का प्रयोग उचित है।



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