बद्रीनाथ 1 नहीं 7 हैं, जानिए सप्तबद्री और भविष्य में केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के लुप्त होने का राज

अनिरुद्ध जोशी| Last Updated: शुक्रवार, 13 मई 2022 (17:25 IST)
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dham temple : छोटा चार धाम में से एक है धाम। कहते हैं कि भविष्य में यह धाम लुप्त हो जाएगा। वर्तमान में उत्तराखंड के चमोली में स्थित मुख्‍य के अलावा 6 बद्रीनाथ धाम और है जिसे सप्त बद्री का जाता है। आओ जानते हैं इन सभी के रहस्य को।


1. श्री बद्रीनाथ : यह मुख्‍य बद्रीनाथ धाम है जो उत्तराखंड के चमोली में बद्रिकावन में केदारनाथ के पास स्‍थित है। यह बड़ा और छोटा चार धाम में से एक तीर्थ क्षेत्र है।

2. श्री आदि बद्री : इसे सबसे प्राचीन स्थान कहा जाता है जो उत्तराखंड के चमोली के कर्ण प्रयाग में स्थित है। यहां पर श्रीहरि विष्णु विराजमान है।
3. श्री वृद्ध बद्री : यह स्थान भी चमोली में जोशीमठ के पास अनिमठ में स्थित है।

4. श्री भविष्य बद्री : कहते हैं कि भविष्य में जब केदारनाथ और बद्रीनाथ लुप्त हो जाएंगे तब यही स्थान तीर्थ क्षेत्र होगा। यह स्थान भी चमोली में जोशीमठ के पास सुभैन तपोवन में स्थित है।

5. श्री योगध्यान बद्री : यह स्थान भी चमोली में पांडुकेश्वर में स्थित है।
6. श्री ध्यान बद्री : यह स्थान भी चमोली में उर्गम घाटी (कल्पेश्वर के समीप) स्थित है।

7. श्री नृसिंह बद्री : यह स्थान भी चमोली में जोशीमठ के पास स्थित है।

लुप्त हो जाएगा बद्रीनाथ धाम (will disappear):
1. पुराणों अनुसार भूकंप, जलप्रलय और सूखे के बाद गंगा लुप्त हो जाएगी और इसी गंगा की कथा के साथ जुड़ी है बद्रीनाथ और केदारनाथ तीर्थस्थल की रोचक कहानी। भविष्य में नहीं होंगे बद्रीनाथ के दर्शन, क्योंकि माना जाता है कि जिस दिन नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जाएंगे, बद्रीनाथ का मार्ग पूरी तरह बंद हो जाएगा। भक्त बद्रीनाथ के दर्शन नहीं कर पाएंगे। पुराणों अनुसार आने वाले कुछ वर्षों में वर्तमान बद्रीनाथ धाम और केदारेश्वर धाम लुप्त हो जाएंगे और वर्षों बाद भविष्य में भविष्यबद्री नामक नए तीर्थ का उद्गम होगा।

2. यह भी मान्यता है कि जोशीमठ में स्थित नृसिंह भगवान की मूर्ति का एक हाथ साल-दर-साल पतला होता जा रहा है। जिस दिन यह हाथ लुप्त हो जाएगा उस दिन ब्रद्री और केदारनाथ तीर्थ स्थल भी लुप्त होना प्रारंभ हो जाएंगे।


3. चार धाम में से एक बद्रीनाथ के बारे में एक कहावत प्रचलित है कि 'जो जाए बदरी, वो ना आए ओदरी'। अर्थात जो व्यक्ति बद्रीनाथ के दर्शन कर लेता है, उसे पुन: उदर यानी गर्भ में नहीं आना पड़ता है। मतलब दूसरी बार जन्म नहीं लेना पड़ता है। शास्त्रों के अनुसार मनुष्‍य को जीवन में कम से कम दो बार बद्रीनाथ की यात्रा जरूर करना चाहिए।



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