देवास का दुर्गा मंदिर : जागृ‍त या शापित

कहा जाता है कि यहाँ आत्मा भटकती है

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यहाँ के स्थानीय रहवासियों का कहना है कि इस मंदिर से अजीबोगरीब तरह की आवाजें आती हैं। कभी शेर के दहाड़ने की आवाजें आती हैं तो कभी घंटों का नाद सुनाई देता है। कभी सफेद वस्त्रों में लिपटी महिला की परछाई यहाँ डोलती नजर आती है। यहाँ के लोग दिन ढलने के बाद इस मंदिर की ओर रुख करने से डरते हैं

मंदिर में लगातार दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं में से एक संजय शलगावकर ने हमें बतायकि इस मंदिर में गलत इरादे से आने वाले व्यक्तियों का हमेशा अहित होता है। कुछ लोगों ने मंदिर की जमीन को दूसरे उपयोग में लाने के लिए मंदिर को ध्वस्त करने की कोशिश की लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाए। मंदिर को ध्वस्त करने में लगे सभी लोगों के साथ अजीबोगरीब घटनाएँ हुईं। यहाँ काम कर रहे मजदूरों को गुंबद से आग निकलती दिखाई दी। इसके बाद मंदिर को तोड़ने का काम बीच में ही रोक दिया गया। अब यह मंदिर सुनसान पड़ा रहता है।

संजय बताते हैं कि मंदिर का एकांत देखकर यदि कोई व्यक्ति यहाँ अनैतिक कृत्य करने की कोशिश करता है तो उसे शारीरिक कष्ट उठाना ही पड़ता है। हमारे सामने ऐसे अनेक वाकये हुए हैं।

अब ये किस्से सच हैं या अफवाह! इस बारे में दावे से कुछ कहा नहीं जा सकता। लेकिन मंदिर से जुड़े अजीबोगरीब किस्सों के कारण इस मंदिर की सुध कोई नहीं लेता। मंदिर के वास्तु को देखकर लगता है कि यह मंदिर कभी काफी खूबसूरत रहा होगा लेकिन अब यह खण्डहर में तब्दील होता जा रहा है।

- श्रुति अग्रवाआस्था और अंधविश्वास की इस कड़ी में दर्शन कीजिए एक अनोखे मंदिर के। इस मंदिर के बारे लोगों की अलग-अलग मान्यताएँ हैं। कोई कहता है यह मंदिर जाग्रत है तो कुछ का मानना है शापित। किसी का दावा है कि यहाँ की देवी भोग में बलि लेती हैं तो कुछ कहते हैं कि यहाँ एक महिला की आत्मा भटकती है। जी हाँ, जितने मुँह, उतनी बातें। मध्यप्रदेश के देवास जिले में स्थित इस ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर से कई किंवदंतियाँ जुड़ी हुई हैंकहा जाता है कि देवास के महाराजा ने इस मंदिर का निर्माण कराया था लेकिन मंदिर निर्माण के बाद से ही राजघराने में अशुभ घटनाएँ घटने लगीं। पारिवारिक कलह होने लगे। स्थानीय लोग बताते हैं कि यहाँ की राजकुमारी के राज्य के सेनापति से प्रेम संबंध थे जो राजा को नागवार गुजरे। उसके बाद रहस्यमय परिस्थितियों में राजकुमारी की मृत्यु हो गई वहीं सेनापति ने भी मंदिर परिसर में आत्महत्या कर ली।
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इसके बाद राजपुरोहित ने राजा को सलाह दी कि मंदिर अपवित्र हो चुका है। मंदिर में प्रतिष्ठित मूर्ति को यहाँ से हटाकर कहीं और स्थापित कर दिया जाए। इसके बाद राजा ने माँ की मूर्ति को पूरे सम्मान के साथ उज्जैन के बडे़ गणेश मंदिर में स्थापित करवा दिया और माँ की एक प्रतिमूर्ति को रिक्त स्थान पर रख दिया गया। लेकिन इसके बाद भी इस मंदिर में होने वाली अजीबोगरीब घटनाओं में किसी तरह की कोई कमी नहीं आई।
कुछ लोग आस्थावश यहाँ दर्शन के लिए आते हैं लेकिन एक कल्पित डर के चलते वे भी दिन ढलने से पहले ही मंदिर परिसीमा से बाहर निकल जाते हैं। आप इस संबंध में क्या सोचते हैं, हमें बताइएगा?



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