उत्तराखंड में 'सरोगेट मां' को भी अवकाश

देहरादून| पुनः संशोधित मंगलवार, 11 नवंबर 2014 (17:50 IST)
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देहरादून। उत्तराखंड में सरोगेसी के माध्यम से मां बनने वाली महिलाओं को भी मातृत्व अवकाश दिया जाएगा।
 
प्रदेश सरकार ने इसके साथ ही निजी बिल्डरों द्वारा बनाए जाने वाले घरों में 15 फीसदी आवास कमजोर आय वर्ग के लोगों के लिए रखने तथा पर्वतीय क्षेत्रों में उच्च शिक्षा में पूंजी निवेश के लिए सिक्योरिटी राशि आधी करने जैसे कई महत्वपूर्ण निर्णय किए हैं।
 
आधिकारिक सूत्रों ने आज यहां बताया कि मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में कल शाम हुई मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य सरकार की नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण को लागू करने के लिए विधानसभा में विधेयक लाने का भी फैसला किया गया। मंत्रिमंडल ने निर्णय किया कि अब सरोगेसी के माध्यम से मां बनने वाली महिला कर्मचारियों को भी मातृत्व अवकाश दिया जाएगा। 
 
राज्य मंत्रिमंडल ने निजी बिल्डरों द्वारा बनाए जाने वाले अपार्टमेंट्स में 15 फीसदी आवास कमजोर आय वर्ग के लिए रखे जाने का फैसला करते हुए यह भी तय किया कि यदि कोई बिल्डर ऐसा नहीं करता है तो उसे अपने प्रोजेक्ट कोष का 15 फीसदी सरकार को या संबंधित प्राधिकरण को जमा कराना होगा।
 
पर्वतीय क्षेत्रों में उच्च शिक्षा में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक सिक्योरिटी राशि को 10 करोड़ रुपए से घटाकर पांच करोड़ रुपए किया गया है। इसी प्रकार विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए यह धनराशि 7.5 करोड़ रुपए से घटाकर चार करोड़ रुपए कर दी गए है।
 
कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया है कि अब सप्ताह में छह दिन कार्य होगा और साथ ही बायोमैट्रिक उपस्थिति को भी अनिवार्य बनाया जाएगा, हालांकि महीने के दूसरे शनिवार को अवकाश जारी रहेगा।
 
बैठक में यह भी तय किया गया कि सचिवालय में फाइलों के निस्तारण में तेजी लाने के लिए शनिवार को कोई बैठक नहीं की जाएगी तथा केवल फाइल संबंधी कार्य निपटाया जाएगा। मंत्रिमंडल ने उपखनिजों पर वैट को पांच फीसदी से बढ़ाकर 13.5 फीसदी करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी।
 
साथ ही बैठक में निर्णय किया गया कि आबकारी, तंबाकू तथा राज्य से बाहर जाने वाले खनन उत्पादों पर एक से दो प्रतिशत के बीच अधिभार (सेस) लगाया जाएगा और इससे प्राप्त धनराशि को व्याधि निधि में जमा कराया जाएगा जिससे गंभीर रोगों से पीड़ित लोगों की सहायता की जा सके। मंत्रिमंडल ने कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र में कैंसर की जांच तथा उपचार के लिए एक-एक केंद्र स्थापित करने का फैसला भी किया।
 
बैठक में राज्य के शहीद आंदोलनकारियों के फोटो विधानसभा में इसी सत्र में लगाने का भी फैसला किया गया। यह भी तय किया गया कि राज्य के शहीद आंदोलनकारियों के गांवों को आदर्श गांव बनाने के लिए ग्राम्य विकास विभाग को नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। राज्य आंदोलनकारी कल्याण कोष के लिए 10 करोड़ रुपए देने और 60 वर्ष से अधिक आयु के आंदोलनकारियों को पेंशन देने का भी फैसला किया गया है। (भाषा)



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