उत्तराखंड में श्रद्धालुओं को बड़ी राहत, तय सीमा से ज्यादा लोग कर सकेंगे चार धाम यात्रा

नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने चारों धाम में प्रतिबंध के साथ यात्रियों की निर्धारित संख्या से अधिक को दर्शन करने के लिए जाने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने निर्धारित संख्या से अधिक तीर्थयात्रियों को जाने व दर्शन करने पर लगी रोक को हटा दिया है।
 
कोर्ट ने इस यात्रा के लिए ई-पास की अनिवार्यता को भी समाप्त कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि शासन को कोविड प्रोटोकॉल का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए तीर्थयात्रियों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा।
 
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के सम्मुख महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि चारधाम यात्रा करने के लिए कोविड के मद्देनजर श्रद्धालुओं की संख्या निर्धारित कर दी थी, लेकिन वर्तमान समय मे प्रदेश में कोविड के केस ना के बराबर आ रहे हैं, इसलिए चारधाम यात्रा करने के लिए श्रद्धालुओं की निर्धारित संख्या के आदेश में संशोधन किया जाए।
 
कोर्ट के सम्मुख महाधिवक्ता ने कहा कि 40 दिन मात्र की ही यह यात्रा अब शेष है। ऐसे में जो भी तीर्थयात्री आ रहे हैं, सभी को दर्शन की अनुमति मिलनी चाहिए। ऑनलाइन दर्शन करने हेतु रजिस्ट्रेशन करा रहे श्रद्धालु अगर किसी इमरजेंसी में नहीं आ रहे तो धाम दोपहर में ही खाली हो जा रहे हैं। इस कारण स्थानीय लोगों पर रोजी रोटी का संकट है।
 
पूर्व में कोर्ट ने चारधाम यात्रा करने के लिए प्रत्येक दिन केदारनाथ धाम में 800, बद्रीनाथ धाम में 1000, गंगोत्री में 600, यमुनोत्री धाम में कुल 400 श्रद्धालुओं को जाने की अनुमति दी थी।
 
उत्तराखंंड हाईकोर्ट ने चारधाम यात्रा को पूर्ण रूप से खोलने का पता जैसे ही धामों के लोगों को चला तो उनमे खुशी की लहर फ़ैल गयी। यात्रा को पूर्ण रूप से खोलने के बाद केदारनाथ, रुद्रप्रयाग और केदारनाथ यात्रा के मुख्य पड़ावों गुप्तकाशी, सोनप्रयाग, फाटा आदि क्षेत्रों में व्यापारियों ने न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए जश्न मनाया और आतिशबाजी की।

और भी पढ़ें :