सात वचन से बँधी सात राखियाँ

सात राखी : सात वचन

राखी : प्यार का बँधन
स्मृति आदित्य|
WD
WD
यह भारत में ही संभव है कि एक महीन रेशम डोरी से दिल की अनंत गहराइयों में छुपा प्यार अभिव्यक्त हो सकें। के अनमोल रिश्ते को समर्पि‍त यह मन में उमंग की सुरीली घंटियाँ बजा देता है। यूँ भी सावन मास सौन्दर्य का भीना मौसम माना गया है। यह मौसम साज-श्रृंगार और प्यार-अनुराग की कलाभिव्यक्तियों से आपुरित होता है। यही वजह है कि कलाई पर बँधने वाली राखी का सौन्दर्य रिश्ते की सादगी पर जीत जाता है।

इस मोहक मनभावन त्योहार पर इस बार बाँधें कुछ ऐसी राखियों को जो हर भाई-बहन के जीवन जीने का अंदाज बदल दें: यह राखी है प्यार, विश्वास, साथ, मुस्कान, सम्मान, स्वतंत्रता और क्षमा की।

प्यार की राखी : यह राखी सलमा-सितारें और मोतियों से नहीं सजी है। यह राखी, अपने मन के आँगन में खिलने वाले प्यार के मासूम फूल से बनी है। इसे बाँधने और बँधाने की यही शर्त है कि बहन और भाई दोनों यह कसम खाए कि उनका प्यार कभी नहीं बदलेगा। हर मौसम, हर समय, हर परिस्थिति में उनके प्यार का फूल तरोताजा रहेगा। चाहे बहन पराए आँगन की तुलसी बन जाए, चाहे रूनझुन पायल छनकाती दुल्हन, भाई ले आए। रिश्तों का सौन्दर्य और सादगी बनी रहे, बची रहे। दिल की गहराई में बसा प्यार निरंतर बढ़ता रहे, फलता-फूलता रहे। यह राखी इस मंगल त्योहार पर यही कसम चाहती है। दोनों के बीच महकते प्यार का फूल पैसों की तपिश से कभी ना मुरझा पाए।
WD
WD
की राखी : यह राखी बड़ी महीन लेकिन मजबूत डोरी से बनी है। इस राखी की यही शर्त है कि विश्वास की रेशम डोर दुनिया के ताने-बाने में कभी ना उलझ पाए। यानी हर हाल में भाई का बहन के प्रति और बहन का भाई के प्रति विश्वास बरकरार रहे। इसे यूँ भी कहा जा सकता है कि दोनों एक-दूसरे के प्रति विश्वास को टूटने नहीं देंगे।
अकारण एकदूजे पर अविश्वास की काली परत चढ़ने नहीं देंगे। अगर किसी एक से विश्वास की दीवार चटकती भी है तो उसकी परिस्थिति को उदार मन से समझने का प्रयास करेंगे। इस राखी को बाँधते हुए कसम लें कि एकदूजे का विश्वास बनेंगेऔर उसे संजोए रखेंगे।

की राखी : 'चाहे सारी दुनिया तुम्हारे विरुद्ध हो तुम्हारा भाई हमेशा तुम्हारे साथ है।' यह अटूट सहारा देते शब्द सच्चे मन से हर बहन के अन्तर्मन में बैठे होने चाहिए। उसका यह भाव कि मेरा भाई है ना, और भाई का यह अहसास कि मेरी बहन सब संभाल लेगी,हर हाल में कायम रहे यही इस राखी को बाँधने की कोमल शर्त है। इस दुनिया में माँ और पिता के बाद भाई ही तो सच्चा निस्वार्थ साथ दे सकता है। देश का हर भाई अपनी बहन के साथ रहे एक अहसास बन कर, एक विश्वास बन कर तभी इस राखी की सार्थकता है।



और भी पढ़ें :