त्योहार राखी का, बजट आपका!

हर वर्ग में मने राखी का त्योहार

राजश्री कासलीवाल|
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भारत भर में मनाया जाने वाला और भाई-बहन के आत्मीय बंधन को और मजबूत करने वाला पर्व अब आपके द्वार पर दस्तक देने आ पहुँचा है। त्योहारों के आते ही हर साल नित नए अलग-अलग त्योहारों पर बाजारों में खरीद-फरोख्त की दुकाने सजने लग जाती है। चाहे होली हो, दीपावली हो या फिर राखी। त्योहारों के दिन नजदीक आते ही मन में नया हर्षोल्लास जगमगाने लगता है।


मनाना सभी को अच्छा लगता है पर क्या करें? सभी क‍ी यह‍ी चाहत होती है कि वे भी बाजारों के अनुरूप सजे सामानों से अपने घर का हर त्योहार मना सकें। लेकिन यह हर मध्यमवर्गीय परिवार के लिए मुमकिन नहीं होता है। आदमी चाहता तो बहुत कुछ लेकिन कर कुछ नहीं पाता क्योंकि दिनोंदिन बढ़ती महँगाई से लोगों का जीना दूभर हो गया है। और ऐसे में जब सर पर त्योहार आ जाते है तो मानो ऐसा लगता है जैसे आपके सिर पर तलवार लटक रही हो। इस बढ़ती महँगाई के दौर में बच्चों और परिवार की कई बातों को नजरअंदाज करना पड़ता है।
जो लोग बिजनेसमैन है, अच्छा खासा कमा रहे है, उन लोगों को त्योहारों पर कोई फर्क नहीं पड़ता। उनके सारे त्योहार वैसे ही मनते है जैसे रोज घर में दिवाली हो। जिन लोगों की आमदनी ठीक-ठाक है, वे भी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से थोड़ा-सा बचाकर अपना त्योहार तो मना ही लेते है।

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लेकिन सबसे ज्यादा असर उन मध्यमवर्गीय परिवार पर पड़ता है या फिर रोजमर्रा मजदूरी करके जीवनयापन करने वालों पर। उनके लिए त्योहार का आनंद तो होता है लेकिन जेब गरम न होने (यानी कि बटुएँ में पैसे नहीं होने) की वजह से उनके त्योहार का रंग फीका पड़ जाता है। और वे लोग त्योहारों का असली लुफ्त नहीं उठा पाते।
ऐसे समय में बड़ा ही सोच का विषय तब बन जाता है जब आपके घर में चार-पाँबहन-बेटियाँ हो और त्योहार के मद्देनजर आपको सभी को कुछ न कुछ देना हो। तब खर्चे का सामंजस्य बिठाना बहुत मुश्किल हो जाता है। इस समय आप हिम्मत ना हारते हुए कुछ खास बातों का ध्यान रखकर त्योहार का आनंद उठा सकते है।



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