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कोई व्यक्ति नहीं मरता है एकदम से, इस तरह मरता है वह

बुधवार,अक्टूबर 6, 2021
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कपालभाति प्राणायाम को हठयोग में शामिल किया गया है। प्राणायामों में यह सबसे कारगर प्राणायाम माना जाता है। यह तेजी से की जाने वाली रेचक प्रक्रिया है। मस्तिष्क के अग्र भाग को कपाल कहते हैं और भाती का अर्थ ज्योति होता है।
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'डिप्रेशन' का कारण वातावरण, परिस्थिति, स्वास्थ्य, सामर्थ्य, संबंध या किसी घटनाक्रम से जुड़ा हो सकता है। आत्मीयता से उसे 'प्राणायाम' के लिए राजी करें।
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कपालभाती प्राणायाम को हठयोग के षट्कर्म क्रियाओं के अंतर्गत लिया गया है। ये क्रियाएं हैं:- 1. त्राटक 2. नेती. 3. कपालभाती 4. धौती 5. बस्ती और 6. नौली। आसनों में सूर्य नमस्कार, प्राणायामों में कपालभाती और ध्यान में ‍विपश्यना का महत्वपूर्ण स्थान है। ...
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आपके मन या शरीर में किसी भी प्राकर की बैचेनी, टेंशन, डिप्रेशन या हाइपर्नेस है तो आप को रात में नींद नहीं आएगी। कई लोगों का दिमाग और जुबान बहुत चलती है जिसके चलते भी अशांति उत्पन्न होती है। लंबे काल तक इससे ग्रस्त रहने से गंभीर रोग भी उत्पन्न हो सकता ...
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प्राणायाम जीवन का रहस्य है। श्वासों के आवागमन पर ही हमारा जीवन निर्भर है और ऑक्सीजन की अपर्याप्त मात्रा से रोग और शोक उत्पन्न होते हैं। प्रदूषण भरे महौल और चिंता से हमारी श्वासों की गति अपना स्वाभाविक रूप खो ही देती है जिसके कारण प्राणवायु संकट काल ...
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प्राणायम की प्रारंभिक क्रिया है अनुलोम-विलोम प्राणायाम। कोरोना के संक्रमण के दौर में फेंफड़ों का मजबूत होना आवश्यक है। अनुलोम विलोम का सही तरीका क्या है? कई लोग इस सामान्य से प्राणायाम को भी नहीं कर पाते हैं। अत: जा‍निए कि कैसे सरल तरीके से करें ...
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कोरोना वायरस की महामारी के काल में प्राणायाम का महत्व बढ़ गया है। खासकर अनुलोम विलोम, भस्त्रिका, उद्गीथ, भ्राममी, उज्जायी और कपालभाति करने का प्रचलन बढ़ा है। कपालभाति प्राणायाम को हठयोग के षट्कर्म क्रियाओं के अंतर्गत लिया गया है। ये क्रियाएं हैं:- ...
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योग के आठ अंग है, यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधी। आसन करने के लिए आसनों को सीखना होगा। प्राणायाम करना बहुत ही सरल होता है। प्राणायाम में रेचक पूरक और कुम्भक यह तीन तरह की प्रक्रिया होती है। मात्र इन तीन तरह की प्रक्रिया ...
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कोविड 19 अर्थात कोरोनावायरस के काल में इम्यूनिटी पावर बढ़ाने के बारे में सभी सोचने लगे हैं। इसके लिए कुछ लोग प्रतिदिन एक्सरसाइज या एक घंटा घुमने की सलाह देते हैं तो कुछ लोग विटामिन सी के अलावा अन्य तरह की आयुर्वेदिक दवाई लेने की सलाह देते हैं। इसी ...
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जल और वायु का परिवर्तन हमारे शरीर के प्राकृतिक ढांचे को बिगाड़ सकता है। फिर चाहे आप कितने ही पोषक तत्व खाएं या कितने ही योग आसन करें शरीर अस्वस्थ ही रहेगा। शरीर और मन के बीच की कड़ी है प्राणायाम। प्राणायाम है सृष्टि की वायु और आयु।
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प्राणायम की प्रारंभिक क्रिया है अनुलोम और विलोम। इससे मस्तिष्क में ऑक्सिजन लेवल बढ़ता है और फेंफड़े मजबूत होते हैं। कोरोना के संक्रमण के दौर में फेंफड़ों का मजबूत होना आवश्यकत है। अत: जा‍निए कि कैसे करें अनुलोम विलोम प्राणायाम।
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भस्त्रिका का शब्दिक अर्थ है धौंकनी अर्थात एक ऐसा प्राणायाम जिसमें लोहार की धौंकनी की तरह आवाज करते हुए वेगपूर्वक शुद्ध प्राणवायु को अन्दर ले जाते हैं और अशुद्ध वायु को बाहर फेंकते हैं।
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हमने हिन्दू शास्त्र, योग और आयुर्वेद की किताबों में पढ़ा है कि 100 वर्ष तो जीना बहुत आसान है लेकिन 150 वर्ष स्वस्थ रहकर जिंदगी गुजारना कठिन है और उससे भी कठिन है 500 वर्षों तक जिंदा रहना। हालांकि यह संभव हो सकता है। कैसे? आओ जानते हैं इसी बारे में ...
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हर कोई चाहता है कि जब तक वह जीवित रहे, स्वस्थ ही रहे। स्वस्थ रहते हुए ही अपने बच्चों को बड़ा होते देखे व अपने नाती-पोतों को भी खिला ले। स्वस्थ शरीर में रहते हुए लंबी उम्र जीना हर किसी की इच्छा होती है। योग से आप तन-मन से स्वस्थ रहने के साथ ही अपनी ...
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हमारा शरीर ब्रह्मांड की एक ईकाई है। जैसा ऊपर, वैसा नीचे। जैसा बाहर, वैसा भीतर। संपूर्ण ब्रह्मांड को समझने के बजाय यदि आप खुद के शरीर की संवरचना को समझ लेंगे तो ब्राह्मांड और उसके संचालित होने की प्रक्रिया को भी समझ जाएंगे। यहां प्रस्तुत है शरीर में ...
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यूं तो प्राणायाम अनेक प्रकार के हैं, किन्तु यहां हम उन्हीं प्राणायाम की चर्चा करेंगे, जिन्हें गृहस्थी, बाल, युवा, वृद्ध, पुरुष एवं महिलाएं सुविधापूर्वक करके लाभ प्राप्त कर सकें। प्राणायाम करने वाले को कुछ सावधानियों के साथ नियमों का पालन करना आवश्यक ...
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शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से 3-3 दिन के अंतर से सूर्योदय के समय पहले बाईं नासिका से और शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से 3-3 दिन के अंतर से सूर्योदय के समय पहले दाहिनी नासिका से नि:श्वास प्रवाहित होने का स्वाभाविक नियम है, परंतु-
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विश्वपिता विधाता ने मनुष्य के जन्म के समय में ही देह के साथ एक ऐसा आश्चर्यजनक कौशलपूर्ण अपूर्व उपाय रच दिया है जिसे जान लेने पर सांसारिक, वैषयिक किसी भी कार्य में असफलता का दु:ख नहीं हो सकता। हम इस अपूर्व कौशल को नहीं जानते, इसी कारण हमारा कार्य ...
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'डिप्रेशन' यानी नैराश्य, यानी मन और मानस का असहयोग, यानी प्रकृति से तादात्म्य न हो पाना या जीवन से आस्था उठ जाना। डिप्रेशन यानी जीने का नकारात्मक रवैया, स्वयं से अनुकूलन में असमर्थता आदि। जब ऐसा हो जाए तो उस व्यक्ति विशेष के लिए सुख, शांति, सफलता, ...
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