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वैवस्वत सप्तमी पर करें सूर्यदेव का पूजन, होगी हर मनोकामना पूरी, पढ़ें मंत्र भी

मंगलवार,जुलाई 5, 2022
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Chaturmas 2022 : देवशयनी एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ हो रहा है। कहते हैं कि चातुर्मास में व्रत, तप और साधना करने से बहुत जल्दी लाभ मिलता है। इस माह के नियमों का पालन कर लिया तो सभी तरह के रोग और शोक मिट जाते हैं। चातुर्मास के 4 माह क्या करें और क्या ...
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वर्ष 2022 में आषाढ़ मास में भगवान कार्तिकेय का प्रिय स्कन्द षष्ठी व्रत पड़ रहा है। इस बार यह व्रत 5 जुलाई 2022, मंगलवार के दिन मनाया जाएगा। यह व्रत करने से जीवन की हर परेशानी का निवारण हो जाता है।
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6 जुलाई 2022, बुधवार को ताप्ती जयंती मनाई जाएगी। यह देश की प्रमुख नदियों में से एक है। ताप्ती जन्मोत्सव आषाढ़ शुक्ल सप्तमी को मनाया जाता है। आओ जानते हैं इस नदी के 7 तथ्‍य।
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Vinayak Chaturthi Tithi 2022 आज विनायक चतुर्थी व्रत है। आज के दिन भगवान श्री गणेश की पूजा करने से वे प्रसन्न होते हैं। श्री गणेश की कृपा से जीवन के सभी कार्य बिना विघ्न-बाधा के पूर्ण होते हैं। गणेश जी अपने भक्तों के कार्यों में आने वाले सभी संकट दूर ...
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see the full list of july month festivals and vrat जुलाई का महीना धर्म-कर्म, तीर्थयात्रा और धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है, क्‍योंकि इसी महीने में शिवभक्तों का प्रिय मास श्रावण और गुरु पूर्णिमा तथा चातुर्मास का आरंभ हो रहा है। श्रावण में ...
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भड़ली नवमी नवमी तक विवाह के लिए शुभ मुहूर्त है। इसके बाद देवशनी एकादशी के बाद सभी तरह के मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे। आओ जानते हैं कि भड़ली नवमी कब है, क्या है इसका महत्व, पूजा विधि, मुहूर्त और विवाह बाधा दूर करने के 5 उपाय।
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Gupt Navratri 2022 इस वर्ष 30 जून 2022 से गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ हो रहा है। इसे आषाढ़ गुप्त नवरात्रि भी कहते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्षभर में कुल 4 नवरात्रि आती हैं, जो पौष, चैत्र, आषाढ और आश्विन माह में पड़ती है। Ashadha Gupt Navratri
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आषाढ़ माह की देवशयनी के बाद से चार माह के लिए व्रत और साधना का समय प्रारंभ हो जाता है जिसे चातुर्मास कहते हैं। सावन, भादो, आश्‍विन और कार्तिक। इन चार माह में कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं करते हैं। आओ जानते हैं इसके 10 कारण।
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हलहारिणी अमावस्या (Halharini Amavasya) इस वर्ष 28 जून 2022, दिन मंगलवार को मनाई जा रही है। यह आषाढ़ माह की अमावस्या है, अत: इसे आषाढ़ी अमावस्या भी कहा जाता है। moon day in the month of Ashada
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Aashadh gupt navratri 2022: आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 30 जून 2022, गुरुवार को प्रारंभ होगी जो 8 जुलाई तक चलेगी। गुप्त नवरात्रि में दश महाविद्याओं की पूजा और साधना होती है।
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ashadha month amavasya 2022 इस बार हलहारिणी अमावस्या 28 और 29 जून दोनों दिन मनाई जाएगी। मत-मतांतर के चलते मंगलवार को भौमवती अमावस्या तथा 29 जून को दान और श्राद्ध की अमावस्या मनाई जाएगी। यहां जानिए अमावस्या के खास उपां और महत्व- amavasya 2022
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हिन्दू धर्म में अमावस्या तिथि का अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान है। इस दिन पितृ निवारण के लिए निम्न उपाय करने से जीवन के समस्त कष्‍ट दूर होते हैं।
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Ashadha amavasya: 14 जून 2022 से आषाढ़ माह का प्रारंभ हुआ था। आषाढ़ माह की अमावस्या 29 जून को है। इस अमावस्या का बहुत महत्व बताया गया है। इस दिन के एक दिन पूर्व हलहारिणी भौमवती अमावस्या रहेगी। आओ जानते हैं इस दिन का महत्व, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और ...
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यहां पढ़ें मासिक शिवरात्रि व्रत की पौराणिक कथा। कैसे एक शिकारी ने दिन-रात भूखे रहकर, अनजाने में ही शिव जी के पूजन का पुण्यफल प्राप्त किया और प्राणियों पर दया दिखाकर इस व्रत को पूर्ण किया और उसका अच्छा फल भी पाया। आप भी पढ़ें मासिक शिवरात्रि व्रत की ...
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रवि प्रदोष व्रत की कथा, पूजा विधि मंत्र और 7 सरल तरीके शिव को प्रसन्न करने के
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Masik Shivratri 2022: शिवरात्रि और महाशिवरात्रि के अलावा हर माह मासिक शिवरात्रि आती है। प्रति माह कृष्‍ण पक्ष की जो चतुर्दशी होती है उसे मासिक शिवरात्रि कहते हैं। इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव की विधिवत पूजा करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। इस बार ...
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Ravi Pradosh: प्रत्येक माह में दो प्रदोष होते हैं। त्रयोदशी तिथि को प्रदोष कहते हैं। इस दिन भगवान शिव के साथ ही माता पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है। जो प्रदोष जिस वार को आता है उसे उस वार के नाम से जाना जाता है। हर प्रदोष का अलग ही महत्व होता है। ...
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Pradosh vrat june 2022 : हर माह में दो प्रदोष व्रत रखे जाते हैं। शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष का प्रदोष। त्रयोदशी तिथि के दिन यह व्रत रखा जाता है। आओ जानते हैं अगला प्रदोष व्रत कब है, पूजा के मुहूर्त और विधि के साथ ही मंत्र और महत्व भी जानें।
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Ambuvachi Mela: कामाख्या देवी मंदिर देश के 52 शक्तिपीठों में सबसे प्रसिद्ध है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यहां पर देवी सती की योनि गिरी थी। कामाख्या देवी शक्तिपीठ असम की राजधानी दिसपुर के पास गुवाहाटी से 8 किलोमीटर दूर कामाख्या में है। यह शक्तिपीठ ...
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